सर्पदंश से बचाव के संबंध में दिया जा रहा प्रशिक्षण, जानिए कैसे करें बचाव…

- सर्पदंश से बचाव के संबंध में रतलाम जिले के 45 प्रतिभागी उज्जैन में ले रहे प्रशिक्षण

सर्पदंश से बचाव के संबंध में दिया जा रहा प्रशिक्षण, जानिए कैसे करें बचाव…
----------------------------------------------------------------------

 सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम ।
सर्पदंश से सुरक्षा परियोजना प्रशिक्षण अध्ययन एवं अनुसंधान कार्यक्रम उज्जैन जिले के नाग एनफोनमेंट पार्क में 19 जनवरी से आयोजित किया गया है, यह कार्यक्रम 23 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा । प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न सांपों के प्रकार, उन्हें पकड़ने के उचित तरीके, सर्पदंश के दौरान प्रारंभिक उपचार और उन्हें उचित प्रकार से छोड़ने के तरीकों की कार्य आधारित तकनीको की जानकारी दी गई ।
     प्रशिक्षण कार्यक्रम के संबंध में मुकेश इंगले ने बताया कि मानव सांप सह अस्तित्व को बढ़ावा देना, सांपों और उनके आवासों का संरक्षण करना साथ ही जागरूकता एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से सर्पदंश से मृत्यु मुक्त भारत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महाराष्ट्र के प्रशिक्षक केदार भिड़े ने बताया कि सांप प्रकृति का अनुपम उपहार है, अन्न के दुश्मन चूहों की 80 प्रतिशत आबादी को सांप नियंत्रित करते हैं।  भारत जैसे कृषि प्रधान देश में सांप बड़े ही प्रभावी ढंग से चूहों की आबादी को रोकते हैं, क्योंकि केवल वे ही चूहों के बिल में भीतर तक घुसकर उनका सफाया करने में माहिर है, सांपों का धार्मिक और पौराणिक महत्व तो है ही, वह आर्थिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए सांपों को बचाया जाए। चेन्नई के प्रशिक्षक ज्ञानेश्वर जी ने बताया कि मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से कोबरा, करैत, रसल वाइपर, सी स्केल्ड वाइपर ही विषैले सर्प है। मध्य प्रदेश में पाए जाने वाले शेष प्रकार के ज्यादातर सर्प विष विहीन होते है।        
                       ऐसे करें बचाव
  सर्प काटने के प्रारंभिक उपचार के रूप में सर्प द्वारा काटे गये स्थान को  बांधना  नहीं चाहिए। सांप द्वारा काटे गये स्थान पर काटना नहीं चाहिए, उसे पर साबुन इत्यादि का बिल्कुल उपयोग नहीं करना चाहिए। झाड़ फूंक टोना-टोटका करने में समय नष्ट नहीं करना चाहिए। तत्काल नजदीकी अस्पताल में ले जाकर एंटी स्नेक वेनम के इंजेक्शन लगवाना चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि सांप के कान नहीं होते और सांप दूध नहीं पीता है। प्रशिक्षण में सांप का कार्य करने वाले, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी, वन विभाग के कर्मचारी, आपदा प्रबंधन के कर्मचारी, जिला जन अभियान परिषद के विभिन्न सदस्य ने सहभागिता की।