खूनी मातम के दौरान कई श्रद्धालु जख्मी हुए, चूल पर चले, अलविदा मजलिस के साथ चेहल्लुम का समापन
हजरत इमाम हुसैन साहब की याद में किया मातम, लौटने लगे जायरीन
✍सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम
जावरा में स्थित विश्व प्रसिद्ध हुसैन टेकरी शरीफ परिसर में आयोजित दस दिवसीय चेहल्लुम का समापन ग्यारवें दिन शुक्रवार की दोपहर अलविदा मजलिस के साथ हुआ। इसके पहले गुरुवार दोपहर में जुलूस निकाले गए। वहीं अकीकतमंदों (श्रद्धालु, जायरीन) ने हजरत इमाम हुसैन साहब की शहादत को याद करते हुए खूनी मातम कर आस्था (इमान) प्रकट की। श्रद्धालुओं ने या हुसैन…या हुसैन कहते हुए शरीर पर नुकुली वस्तुएं बरसाई इससे कई श्रद्दालु जख्मी हो गए तथा उनके शरीर से खून बहने लगा। इसके बाद भी वे मातम करते रहे। वहीं मुख्य कार्यक्रम मातम-ए-खंदक (चूल) का आयोजन शनिवार रात दस बजे शुरू हुआ। चूल में पहले चयनित दूल्हें नंगे पैर अंगारों से निकाले। इसके बाद शिया समुदाय के लोग चूल से निकले। रात 12 बजे बाद आम लोगों ने चूल से निकलना शुरू किया। चूल से निकलने का कार्यक्रम शुक्रवार सुबह तक चलता रहा। मुख्य कार्यक्रम में शिरकत करने देश के अनेक हिस्सों से हजारों जायरीन पहुंचे थे।
चेहल्लुम के दसवें दिन दिन में अलग-अलग जुलूस निकाले गए। दस दिन पहले से श्रद्धालु हुसैन टेकरी शरीफ पहुंचना शुरू हो गए थे। अनेक श्रद्धालुओं ने दस दिन तक वहां रहकर सभी कार्यक्रमों में शिरकत की। वहीं दसवें दिन मुख्य कार्यक्रम में शिरकत करने ट्रेनों, बसों व निजी वाहनों से एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। मातम-ए-खदंक के लिए अलग-अलग चार चूल बनाए गई थी। पहले प्रत्येक चुल से हुसैनी मिशन संस्था द्वारा चयनित 12-12 दूल्हे अंगारों पर से गुजरे। इसके बाद अनुमान के अनुसार 30 हजार से अधिक आम श्रद्धालु ने चूल से निकले। खुले मौसम में डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु मुख्य कार्यक्रम वाले दिन हुसैन टेकरी आते है, लेकिन इस बार बारिश के चलते एक से सवा लाख श्रद्धालुओं के हुसैन टेकरी पहुंचने का अनुमान है। पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। अंतिम दिन शुक्रवार सुबह हुसैनी मिशन द्वारा अलम जुलूसव झुले ताजिया जुलजिनाह मुबारक निकाला गया, जो मेंहदीकुंआ, अब्बास अलमदार तथा टॉप शरीफ के रोजे का तवाब करते हुए दोपहर में बड़े रोजे पर पहुंचा, जहां अलविदा मजलिस हुई तथा तर्बरूक तस्कीम किया गया। इसी के सात दस दिवसीय चेहल्लूम का समपान हुआ। हुसैन टेकरी आए जायरीन अपने घरों को लौटना शुरू हो गए। लौटने वाले जायरीनों की रात तक जावरा रेलवे स्टेशन व बस स्टैंडों पर भारी भीड़ रही।