भविष्य की तकनीकों का विकास क्वांटम फिजिक्स से हो रहा - संजय डॉ. वाते
- कोई भी व्यक्ति अपने साथियों, अपने परिवेश और अपने गुरुओं के मार्गदर्शन से ही आगे बढ़ता है- गजेंद्र सिंह राठौर
✍सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम।
क्वांटम भौतिकी में किसी भी भौतिक गुण (जैसे ऊर्जा, संवेग) की सबसे छोटी, अविभाज्य इकाई या पैकेट है, जो बताती है कि पदार्थ और ऊर्जा परमाणु व उप-परमाणु स्तर पर कैसे व्यवहार करते हैं। यह सतत न होकर असतत पैकेटों में होती है। जैसे प्रकाश के फोटॉन, और आधुनिक तकनीक जैसे लेज़र और कंप्यूटर का आधार है, जिसके द्वारा क्वांटम कंप्यूटर जैसी भविष्य की तकनीकों का विकास हो रहा है।
उक्त विचार इंडियन फिजिक्स टीचर्स एसोसिएशन (आयएपीटी) और रतलाम फिजिक्स टीचर्स एसोसिएशन (आरएपीटी) द्वारा आयोजित संगोष्ठी में भौतिकविद, पूर्व प्राचार्य डॉ. संजय वाते ने व्यक्त किए। उन्होंने ' क्वांटम मेकेनिक्स - टनलिंग एंड कम्प्यूटिंग ' विषय पर उद्बोधन में कहा कि यह भौतिकी की वह शाखा है जो परमाणु और उप-परमाणु कणों (इलेक्ट्रॉन, फोटॉन, न्यूट्रिनो) के व्यवहार का अध्ययन करती है, जो हमारी सामान्य दुनिया के नियमों से अलग है। इसमें कण एक साथ कई जगहों पर हो सकते हैं जिसे सुपरपोजिशन कहते हैं या दीवार के आर-पार जा सकते हैं, जिसे टनलिंग कहते हैं।
प्रसिद्ध भौतिकशास्त्री डॉ. एसके जोशी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस वर्ष को अंतर्राष्ट्रीय क्वांटम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी वर्ष घोषित किया है। इसका उद्देश्य 2025 में क्वांटम यांत्रिकी के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर का उपयोग जीवन के सभी पहलुओं पर क्वांटम विज्ञान और उसके अनुप्रयोगों के महत्व और प्रभाव के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने में मदद करने के लिए करना है। वरिष्ठ भौतिकविद प्रो. पीपीदुबे ने प्रयोग के माध्यम से विषय को व्यक्त किया उन्होंने प्रयोग प्रदर्शन करते हुए क्वांटम फिजिक्स के विभिन्न पहलुओं की व्याख्या की।
भौतिकशास्त्री गजेन्द्र सिंह राठौर का अभिनंदन
भौतिक शास्त्र के माध्यम से देश और दुनिया में रतलाम का नाम रोशन कर रहे और हाल ही में अबू धाबी में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में सम्मिलित होकर आए भौतिकशास्त्री गजेंद्र सिंह राठौर का इस अवसर पर अभिनंदन किया गया । डॉ. एसके जोशी ने गजेंद्र सिंह राठौर के जीवन संघर्ष और भौतिक शास्त्र की क्षेत्र में की गई मेहनत को सराहते हुए उनके कार्यों पर प्रकाश डाला। राकेश सिंह जादौन ने राठौर के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों की चर्चा की । सम्मान के प्रत्युत्तर में गजेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने साथियों, अपने परिवेश और अपने गुरुओं के मार्गदर्शन से ही आगे बढ़ता है । मैंने भी जो कुछ किया वह इन सब के सहयोग से किया और विषय को लेकर मैंने जितने भी कार्य किया उसके पीछे मेरा उद्देश्य यही रहा कि मेरा विद्यालय और मेरे विद्यार्थी के प्रति मैं सदैव समर्पित रहूं । इस दिशा में जो कुछ कर सका वह सभी आपके समक्ष है । इस अवसर पर अतिथियों का स्वागत श्यामवंत पुरोहित , जितेंद्र जोशी , स्वतंत्र श्रोत्रिय, अकरम पठान, श्याम बोरीवाल ने किया। संचालन आशीष दशोत्तर ने किया। आभार सुधीर गुप्ता ने माना।