बस ऑपरेटरों की हडताल: राजस्थान में निजी बसों के पहिये थमे, मध्य प्रदेश में दो मार्च से होगी की हड़ताल
- राजस्थान में बसों की हड़ताल से यात्रियों को आवागमन में हो रही परेशानी
✍ सर्च इंडिया न्यूज, डेस्क रतलाम ।
विभिन्न मांगों को लेकर राजस्थान प्रदेश में निजी बस ऑपरेटरों ने 23 फरवरी 2026 की रात 12 बजे से हड़ताल कर दी है। इससे पूरे राजस्थान में करीब 35 हजार निजी बसों के पहिये थम गए है। वहीं राजस्थान की राजधानी जयपुर में निजी टैक्सी संचालकों ने भी हड़ताल कर दी है। हड़ताल के चलते राजस्थान के विभिन्न शहरों व कस्बों में लाखों यात्री प्रभावित हुए हैं और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के लिए काफी मशक्कत का सामान करना पड़ रहा है। इधर, मध्यप्रदेश में दो मार्च से निजी बस ऑपरेटरों की हड़ताल हो सकती है। सागर में दो दिन पहले आयोजित मध्यप्रदेश के सागर में आयोजित प्रदेश के बस ऑपरेटरों की बैठक में दो मार्च 2026 से हज़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया है। यदि होली पर्व के पहले मध्यप्रदेश में भी बसों की हड़ताल होती है तो बस यात्रियों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राजस्थान में निजी बसों की हड़ताल से यात्रियों के सामने आवागमन की समस्या खड़ी हो गई है। विशेष कर जिन शहरों व कस्बों में रेल लाइन नहीं है, वहां यात्री ज्यादा परेशान हो रहे है। वहीं जहां रेलवे स्टेशन हैं, वहां स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बड़ गई है। राजस्थान कॉन्ट्रेक्ट कैरिस बस ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा के अनुसार आरटीओ द्वारा प्रायवेट बस ऑपरेटर को लगातार परेशान किया जा रहा है। बसों व टैक्सियों में लगेज केरियर लगाने पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी वार्ता के लिए बुलाया था लेकिन मांगे नहीं मानने से वार्ता सफल नहीं हुई। उधर, बस ऑपरेटरों का कहना है कि केरियर लगा होने पर आरटीओ द्वारा जुर्माना वसूला जा रहा है, जबकि केरियर यात्रियों की सुविधा के लिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली बसों में अधिकांश समय यात्री अपने सामान बसों की छतों रखते हैं, केरियर हटाने वे सामान कहां रखेंगे। बस ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि 28 फरवरी को अजमेर में होने वाली पीएम की रैली के लिए बसें नहीं लगाई जाएगी। हड़ताल के चलते राजस्थान के कोटा, बांसवाड़ा, सीकर, झूंझनू, उदयपुर, जयपुर सहित कई जिलों में प्रायवेट बसों की हड़ताल से यात्री परेशान होते रहें। बस ऑपरेटरों की मांग है कि सीज की गई बसों को तत्काल छोड़ा जाए, नियमों के विपरीत बनाए गए चालान निरस्त किए जाए, परिवाहन विभाग की तरफ से फिटनेस पर लगी रोक हटाई जाए, निलंबित आरसी-फिटनेस बाहर किए जाए, स्टेज कैरिज बसों की छतों पर माल ढुलाई के स्पष्ट प्रावधान लागू करें, बसों पर लगेज केरियर की अनुमति दी जाए। अन्य राज्यों की तरह टेम्परेरी परमिटों की अवधि 24 घंटे की जाए आदि। ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि मांगे नहीं मानने तक हड़ताल जारी रहेगी।
रतलाम में बस एसोसिएशन ने ज्ञापन सौंपा
मध्य प्रदेश में नई परिवहन नीति का बस ऑपरेटर दो माह से विरोध कर रहे है। दो माह पहले रतलाम में आयोजित बस ऑपरेटरो की बैठक में नई नीति का विरोध करने की बात कही गई थी। वहीं दो दिन पहले सागर में आयोजित बैठक में सरकार द्वारा बस ऑपरेटरों की मांगे नहीं मानने पर दो मार्च 2026 से मध्यप्रदेश में बसों की हड़ताल करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में मंगलवार को रतलाम जिला बस संचालक एसोसिएशन के पदाधिकारियों व सदस्यों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर डिप्टी कलेक्टर राधा महंत को ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि नई नीति को नहीं बदला गया तो बसों का संचालन दो मार्च से बंद कर दिया जाएगा।
विचार-विमर्श के बाद लिया हड़ताल का निर्णय
रतलाम जिला बस एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुबेंद्रसिंह गुर्जर के अनुसार मध्य प्रदेश के सागर शहर में 22 फरवरी को प्रदेश के बस मालिकों व संस्थाओं के प्रमुख पदाधिकारियोंकी बैठक हुई है, उसमें विचार-विमर्श के बाद नई परिवहन नीति के खिलाफ दो मार्चे से हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया है। स्टेज कैरिज बसों के संचालन के लिए लाई जा रही नई नीति दमनकारी है, इसे लेकर बस मालिक आहत है। बस ऑपरेटरों की मांग है कि वर्तमान में बसों के संचालन की जो व्यवस्था है, उसके तहत ही प्रदेश में बसों का संचालन किया जाए। मांगे नहीं मानने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। इस अवसर पर एशोसिएशन के अय्यूब मेव, विकास अग्रवाल, मनीष जैन, पंकज उदीवाल, भारतसिंह राठौड़, लक्ष्मणसिंह सिसौदिया, विकास अग्रवाल, श्यामलाल टांक, विक्रांत ओहरी, रवि चोरमा, राजकुमार कसेरा आदि उपस्थित थे।