महिला दिवस विशेष : नल-जल योजना का सफल संचालन कर मिसाल बनीं सरपंच जमुना मईडा
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✍ सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम ।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रतलाम जिले के सैलाना विकासखंड की ग्राम पंचायत अडवानिया की सरपंच जमुना मईडा महिला नेतृत्व और जनसेवा की प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई हैं। उन्होंने अपने प्रयासों से गाँव में नल-जल योजना को सफलतापूर्वक संचालित कर ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को पानी की समस्या से बड़ी राहत दिलाई है।
रतलाम जनसम्पर्क विभाग द्वारा जारी समाचार के अनुसार रतलाम जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत अडवानिया जिले का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है, जहां प्रसिध्द केदारेश्वर महादेव मंदिर है और क्षेत्र को केदारेश्वर के नाम से जाना जाता है। यहां पर्वतों से झरनों के रूप में पानी बहता है, लेकिन इसके बावजूद गांव में पेयजल की व्यवस्था लंबे समय तक चुनौती बनी हुई थी। सरपंच बनने के बाद जमुना मईडा ने संकल्प लिया कि गांव में पानी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि महिलाओं को पानी के लिए संघर्ष न करना पड़े। ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की अध्यक्ष के रूप में उन्होंने बंद पड़ी नल-जल योजना को व्यवस्थित कर नियमित रूप से संचालित करवाया। उन्होंने बताया कि पहले नलकूपों में लगी मोटर बार-बार जल जाने के कारण योजना प्रभावित हो जाती थी और पानी का संकट खड़ा हो जाता था। इस समस्या को देखते हुए दो नई मोटरें खरीदी गईं, पाइप लाइन की मरम्मत कराई गई और पूरी व्यवस्था को सुधारकर योजना को सुचारू रूप से चालू किया गया। आज इस योजना के माध्यम से गांव के 300 से अधिक घरों तक नल के माध्यम से पानी पहुंच रहा है। योजना के रखरखाव के लिए प्रति परिवार 100 रुपये जलकर भी निर्धारित किया गया है और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति समय-समय पर आवश्यक निर्णय लेती है।
सरपंच जमुना मईडा का मानना है कि पंचायत में शासन की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सक्रिय रहना आवश्यक है। इसके लिए वे स्वयं विभागों के कार्यालयों में जाकर कार्यों की जानकारी लेती हैं, बैठकों में भाग लेती हैं और जिला व विकासखंड स्तर के अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखती हैं।
नौकरी छोड़कर गांव के विकास कार्यों में जुटी
जमुना मईडा ने विज्ञान विषय से 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की है तथा इसके बाद नर्सिंग और बी.एड. की पढ़ाई भी की। सरपंच बनने के बाद उन्हें नर्सिंग में नौकरी भी मिल गई थी, लेकिन गांव की सेवा के दायित्व और ग्रामीणों के आग्रह को देखते हुए उन्होंने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पूरी तरह से पंचायत व गांव के विकास कार्यों में जुट गईं। वे परिवार, बच्चों और खेती के साथ-साथ पंचायत के कार्यों को भी पूरी जिम्मेदारी से निभाती हैं। अपने एक माह के बच्चे को साथ लेकर भोपाल तक सरकारी कार्यों के लिए जाना उनके समर्पण और साहस को दर्शाता है। जमुना मईडा का उद्देश्य गांव में अधिक से अधिक जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के कार्य करना है। वे समय-समय पर पौधारोपण अभियान भी चलाती हैं। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने और बच्चियों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए भी निरंतर प्रयास करती हैं। जमुना मईडा का यह समर्पण और नेतृत्व ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। महिला दिवस के अवसर पर उनकी यह पहल महिला सशक्तिकरण और ग्राम विकास का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।