देखे वीडियो...तिरुवनंतपुरम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस में आग लगी, सभी यात्री सुरक्षित, 15 साल पहले मुंबई-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में लगी थी आग
- कोटा मंडल के लूणी रिछा-विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के बीच हुआ हादसा, दिल्ली-मुंबई मार्ग पर रेल यातायात प्रभावित
✍ आरिफ क़ुरैशी/सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम।
दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर कोटा रेल मंडल के लूनी रिछा-विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के बीच 17 मई 2026 की सुबह करीब 5.15 बजे तिरुवनंतपुरम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस के एसी कोच बी-1 में आग लग गई। आग ने पास के रीयल एसएलआर (यात्री सह सामान कोच) घटना के समय अधिकांश यात्री सो रहे थे। आग लगने से यात्रियों में दहशत फैल गई और हड़कंप मच गया। घबराए हुए यात्री जैसे-तैसे तत्काल कोच से नीचे उतरकर दूर चले गए। इसी बीच ट्रेन में चल रहे रेलकर्मी भी वहां पहुंच गए थे और उन्होंन करीब 15 मिनट में पूरा कोच खाली कराकर यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
यात्रियों के बाहर निकलन के कुछ पल बाद ही आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। रेलवे प्रशासन ने सूचना मिलते ही आसपास के फायर ब्रिगेड की दमकलों को भेजा गया। कर्मचारियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक कोच बुरी तरह जल चुके थे। घटना स्थल कोटा मंडल का है लेकिन रतलाम के समीप होने से रतलाम से रतलाम रेल मंडल प्रबंधक (डीआरएम) अश्विन कुमार व अन्य अधिकारी पहले मौके पर पहुंचे। आग के कारणों का पता नहीं चला है, रेलवे प्रशासन द्वारा जांच की जा रही है। रेलवे अधिकारियों व यात्रियों के अनुसार ट्रेन संख्या 12431 तिरुवनंतपुरम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस रविवार 17 मई 2026 की सुबह मुंबई से रतलाम आकर कोटा की तरफ जा रही थी। अलसुबह का समय होने से अधिकांश यात्री सोए हुए थे। सुबह लगभग सवा पांच बजे ट्रेन लूणी रीछा व विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के बीच पहुंची थी और अपनी रफ्तार से जा रही थी। तभी ट्रेन के बी-1 कोच में आग लग गई। यात्रियों को आग लगने का पता चला तो उनमें दहशत फैल गई और हड़कंप मच गया। गार्ड ने ट्रेन से आग निकलते देख तत्काल ड्राईवर को सूचना दी और ट्रेन के रुकवाया, आग ने गार्ड कोच (रीयल एलएसआर) को भी चपेट में ले लिया। ट्रेन रूकने पर तत्काल बी-1 कोच व रीयल एलएसआर को ट्रेन से अलग किया गया। यात्री जैसे-तैसे कोच से बाहर निकले। ट्रेन में चल रहे रेलवेकर्मी भी मौके पर पहुंचे और करीब 15 मिनट में कोच को पूरी तरह खाली करा लिया गया। कोच में करीब 68 यात्री सवार थे। यात्रियों के नीचे उतरने के बाद कोच में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आग की ऊंची-ऊंची लपटे निकलने लगी। यदि समय रहते ट्रेन को नहीं रोका जाता था तथा यात्री कोच से नहीं उतरते तो बड़ा हादसा हो सकता था।
रतलाम व कोटा से पहुंचे अधिकारी
आसपास की दमकलों ने पाया काबू
आग सुबह करीब सवा पांच बजे लगी। तत्काल ट्रेन में सवार किसी रेलकर्मी ने कोटा रेल मंडल को सूचना दी। कोटा कंट्रोल रूम को रविवार सुबह 5.20 बजे आग लगने के सूचना रतलाम मंडल के कंट्रोल रूम को दी गई। घटना स्थल के आसपास के फायर ब्रिगेड और मध्य प्रदेश के स्थानीय अधिकारियों को सूचना दी गई। कुछ ही देर में आसपास के फायर ब्रिगेड की दमकलें व प्रदेश शासन के स्थानीय अधिकारी, कर्मचारी, पुलिसकर्मी आदि मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। वहीं घटना स्थल कोटा मंडल में आता है लेकिन रतलाम से घटना स्थल समीप होने के कारण रतलाम रेल मंडल प्रबंधक (डीआरएम) अश्विन कुमार तथा अन्य अधिकारी भी कुछ समय बाद घटना स्थल पर पहुंच गए। रतलाम से राहत व बचाव के लिए दुर्घटना राहत ट्रेन व टॉवर वैगन मौके पर भेजा गया है। हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है। कुछ समय बाद कोटा मंडल के भी रेलवे अधिकारी-कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे तथा राहत कार्य में जुट गए।
बिजली कनेक्शन काटा, ट्रेन को रवाना किया
आग से ट्रेन का बी-1 कोच जल गया है तथा उसके पास का एक अन्य कोच रीयल एसएलआर (यात्री सह सामान कोच) भी प्रभावित हुआ है। अधिकारियों के अनुसार ट्रेन का बिजली कनेक्शन काट दिया गया है और मार्ग पर यातायात रोक दिया गया है। प्रभावित कोच के यात्रियों को घटनास्थल पर जलपान उपलब्ध कराया गया। प्रभावित कोच को ट्रेन से अलग कर दिया गया है और उसके यात्रियों को अन्य कोचों में बैठाया गया। शेष ट्रेन को कुछ समय बाद कोटा के लिए रवाना किया गया। कोटा स्टेशन पहुंचने पर ट्रेन में अतिरिक्त कोच जोड़ा गया। ट्रेन संख्या 12955 को महिदपुर रोड पर रोका गया है। वहीं अन्य चार-पांच ट्रेनों को दूसरे स्टेशनों पर रोका गया था। रेलवे अधिकारियों व कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत कर एक लाइन से सुबह करीब 8.35 बजे रेल यातायात चालू करवाया और विभिन्न स्टेशनों पर खड़ी ट्रेनों को आगे के लिए रवाना किया गया।
आग पर काबू पा लिया गया
कोटा रेल मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन बताया कि ट्रेन के रीयल एसएलआर और बी-1 कोच में आग लगने की घटना संज्ञान में आई है। घटना की जानकारी मिलने ही तुरंत रेलवे कर्मचारियों ने तत्काल कोच से यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। जिस कोच में आग लगी थी उसे कोच से अलग किया गया। तत्काल फायर ब्रिगेड, रेलवे मशीनरी और प्रदेश के स्थानीय प्रशासन को सूचना दी गई। आग पर काबू पा लिया गया है। मौके पर तीन दमकले मौजूद है।
सबसे पहले गार्ड ने देखा
बताया जाता है कि ट्रेन गार्ड ने गार्ड डिब्बे के पास स्थित बी-1कोच में नीचे से आग निकलते देखी और तत्काल वाकी-टाकी से ड्राईवर को सूचना देकर ट्रेन को रुकवाया। इसके बाद बी-1 कोच व गार्ड के डिब्बे को अलग किया गया और शेष ट्रेन को दूर ले जाकर खड़ा कराया गया। उधर, यात्री जलते हुए कोच के दूसरे गेट से बाहर निकले और उसके बाद आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।
पहला दरवाजा खोलते तो डिब्बे के अंदर आ जाती आग
सूरत से दिल्ली की यात्रा कर रहे एक यात्री ने बताया कि मैं जाग रहा था, शेष यात्री सो रह थे। ट्रेन के जनरेटर में से जोर से आवाज आ रही थी। कांच में से बाहर आग जैसी दिखाई दी। मैं दरवाजे के पास गया, मैने दरवाजा नहीं खोला, मुझे मालूम हो गया था कि दरवाजा खोलूंगा तो अंदर आग आ जाएगी। जोर-जोर से आवाज लगाई जागो-जागो, भागों, बगैर सामान लिए निकलो। आगे के गेट से निकलो, एक नबंर (पीछे वाला गेट) से निकलते तो पूरे कोच के अंदर आग आ जाती और कई व्यक्ति जल सकते थे। कोचबके जिस गेट की तरफ आग लगी थी, वहां से कोई बाहर नहीं निकला। सभी यात्री दूसरे गेट से बाहर से निकले। भगवान की मेहरबानी से वो हादसा नहीं हुआ। दिल्ली व वहां से हरिद्वार जाना है। अब कहां जाएं हमकों पता नहीं है। एक महिला यात्री ने बताया कि वे सुबह पांच बजे उठी थी, बाथरूम जाकर सीट पर आकर बैठी थी, इसी बीच आग लगने की घटना हो गई। हमारा रूपया और सामान कोच में ही रह गया। कई यात्रियों का सामान कोच में ही है। ग्रामीणों ने आकर पहले मदद की। बाद में अधिकारी व कर्मचारी आए। एक अन्य यात्री ने बताया कि कई यात्रियों के मोबाइल फोन, बेग व अन्य सामान जल गया। यात्रियों का यह भी कहना है कि आग बुझाने के लिए दमकले और अधिकारी काफी विलंब से पहुंचे।
15 साल में दूसरा हादसा, पहले मुंबई-दिल्ली
राजधानी एक्सप्रेस में लगी थी आग
मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग पर तिरुवनंतपुरम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में आलोट के पास आग लगने की करीब 15 साल में यह दूसरी घटना है। इसके पहले 18 अप्रैल 2011 की रात थूरिया-विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के मध्य करीब 2.20 बजे ट्रेन संख्या 12951 मुंबई-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के पेंट्री कार में आग लग गई थी। आग से दो डिब्बे प्रभावित हुए थे और उस हादसे में भी सभी यात्री सुरक्षित रहे हैं। आग पहले पेंट्री कार में लगी थी और फिर बी-6 और बी-7 में आग फैल गई थी। आग से पेंट्री कार पूरी तरह से जल गई थी। महिलाओं और बच्चों को बाहर निकालने में मदद करते समय एक यात्री घायल हो गया था।