मनीष माली हत्याकांड : पांचों आरोपियों का निकाला जुलूस, पुलिस रिमांड अवधि खत्म, जेल भेजा

- कार में आलोट से अपहरण कर उज्जैन ले जाकर की थी हत्या

मनीष माली हत्याकांड  :  पांचों आरोपियों का निकाला जुलूस, पुलिस रिमांड अवधि खत्म, जेल भेजा
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✍  सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम/आलोट।   
रतलाम जिले के आलोट नगर स्थित विक्रमगढ़ निवासी मनीष माली की हत्या के मामले में गिरफ्तार पांचों आरोपियों को पुलिस ने पुलिस रिमांड अवधि खत्म होने पर सोमवार को पुन: न्यायालय में पेश किया। वहां से पांचों आरोपियों को जेल भेज दिया गया। न्यायालय में पेश करने के पहले पुलिस ने उनका मेडिकल कराया और पैदल जूलुस निकाला। कड़ी सुरक्षा के बीच सड़क पर आरोपी कान पकड़कर पैदल चलते रहे। आरोपियों को देखने लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। पुलिस का कहना है कि वाहन खराब होने से उन्हें पैदल ले जाया गया।
      उल्लेखनीय है कि 01 मई 2026 की रात करीब साढ़े दस बजे 22 वर्षीय मनीष माली पिता दिनेश माली निवासी वार्ड क्रमांक 14 विक्रमगढ़ आलोट बाजार जाने का कहकर घर से निकला था, लेकिन देर रात तक घर वापस नहीं पहुंचा था। परिजन ने उसकी रात भर तलाश की लेकिन उसका पता नहीं चला था।  दूसरे दिन 02 मई को सुबह पिता व अन्य परिजन ने आलोट पुलिस थाने जाकर पुलिस को उसके लापता होने की जानकारी दी। पिता दिनेश माली ने पुलिस को बताया था करीब डेढ़ वर्ष पहले मुख्य आरोपी मंयक माली उर्फ महेंद्र पिता मेहरबान माली निवासी उज्जैन हाल मुकाम विक्रमगढ़ से किसी बात को लेकर उनके बेटे मनीष का विवाद हुआ था। मनीष का कुछ लोगों ने अपहरण कर लिया है और वे उसे कहीं ले गए है। पुलिस ने सायबर सेल की मदद से मनीष की खोजबीन शुरू की तथा परिजन द्वारा बताए संदेही मयंक  व उसके साथियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो मुख्य आरोपी मयंक ने सारा राज उगल दिया था और पुलिस को बताया कि वह साथियों के साथ मनीष को अपने उज्जैन स्थित मकान पर ले गया था, वहां उसका शव पड़ा है। पुलिस ने मयंक को उज्जैन ले जाकर उसके बताए स्थान से मनीष का शव बरामद किया था। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी मयंक माली उर्फ महेंद्र, रितेश माली, निखिल माली, यश माली व मुज्फ्फर को गिरफ्तार किया था। पांचों आरोपियों को 03 मई को न्यायालय पेश किया गया था। न्यायालय ने आरोपियों को 04 मई तक पुलिस रिमांड पर रखने के आदेश दिए थे।
       पहले थाने का घेराव, फिर किया था चक्काजाम
   मनीष की हत्या की खबर से परिजन व लोगों में आक्रोश फैल गया था और उन्होंने 02 मई को पुलिस पर मनीष की तलाश में विलंब करने का आरोप लगाकर आलोट थाने का घेराव कर नारेबाजी की थी। काफी समझाइश के बाद मामला शांत हुआ था। दूसरे दिन 02 मई को सुबह पुलिस ने उज्जैन में मनीष के शव का पोस्टमार्टम कराकर शव परिजन को सौंप दिय था। शव घर ले जाते समय आलोट में लाकर विक्रमगढ़ रेलवे फाटक के पास सड़क पर रखकर आक्रोशित लोगों ने चक्काजाम कर दिया था और वे आरोपियों के घर बुलडोजर चलाने, उनका जुलूस निकालने, मृतक के एक परिजन को नौकरी देने की मांग कर रहे थे। इसी बीच आरोपियों के अवैध निर्माण जेसीबी से तोड़े गए थे। वहीं कुछ आक्रोशित लोगों ने एक आरोपी के घर आग लगा दी थी तथा एक अन्य आरोपी के घर तोड़फोड़ की थी। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों चक्काजाम कर रहे लोगों से चर्चा कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इसके बाद चक्काजाम खत्म कर शवयात्रा मुक्तिधाम ले जाकर मृतक का अंतिम संस्कार किया गया था।
               अपहरण में प्रयुक्त कार जब्त
आलोट एसडीओपी पल्लवी गौर ने बताया कि पांचों आरोपी पुलिस रिमांड पर थे। उन्हें जेल भेजने के पहले मेडिकल कराने ले जाया गया था। वाहन खराब होने से आरोपियों को कुछ दूर पैदल चलाया गया। काफी कोशिश के बाद भी वाहन चालू नहीं हुआ, दूसरा वाहन आने मे देरी हुई। दूसरा वाहन आने पर आरोपियों को न्यायालय ले जाया गया। आरोपियों ने घटना में प्रयुक्त कार आलोट मे ही रामसिंह दरबार क्षेत्र में छिपाई गई थी, वहां से कार जब्त कर ली गई है।