किसान व उसके दो पुत्रों की हत्या के छह आरोपियों को उम्रकैद, रस्सी से बांधकर फेंक दिया था कुएं में 

-जमीन व खेत में सिंचाई करने के विवाद में की थी हत्या

किसान व उसके दो पुत्रों की हत्या के छह आरोपियों को उम्रकैद, रस्सी से बांधकर फेंक दिया था कुएं में 
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✍  सर्च इंडिया न्यूजरतलाम।
करीब साढ़े पांच वर्ष पहले मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की ग्राम पंचायत सांसर के ग्राम देवरूंडा में जमीन व पानी के विवाद में हुए सनसनीखेज व बहूचर्चित तिरहे हत्याकांड के सभी छह अभियुक्तों को न्यायालय ने दोषी पाया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने अभियुक्त पूंजा  उर्फ पूनमचंद भाभर, पड़ोसी खेत वाले पीरू खराड़ी, इसके भाई दिलीप उर्फ दीपू खराड़ी उर्फ धुलेसिंह खराड़ी, मां रुपली बाई खराड़ी और साथी फूलजी गामड तथा कमलेश खराड़ी उर्फ कमल सभी निवासी ग्राम देवरूंडा  को भादंवि की धारा 302 सहपठित धारा 149 में उम्रकैद की सजा सुनाई। इस धारा में उन पर चार-चार हजार रुपए का जुर्माना भी किया गया। साथ ही सभी अभियुक्तों को साक्ष्य छिपाने के मामले में भादंवि की धारा 201 में सात-सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा व दो-दो हजार रुपए का जुर्माना से भी दंडित किया गया। फैसला अष्ठम सत्र न्यायाधीश निर्मल मंडोरिया ने सुनाया।
        विशेष लोक अभियोजक व सहायक जिला अभियोजन अधिकारी गोल्डन राय ने बताया कि किसान 35 वर्षीय लक्ष्मण भाभर पिता मांगू भाभर निवासी ग्राम देवरूंडा 07 नवंबर 2021  को अपने बड़े पुत्र 13 वर्षीय विशाल व 08 वर्षीय पुष्कर के साथ अपने खेत पर गया था। खेत पर लक्ष्मण का छोटा भाई जगदीश भाभर भी गया हुआ था लेकिन वह शाम को करीब पांच बजे घर लौट आया था। कुछ देर बाद लहसुन चौपने की मजदूरी करने गई लक्ष्मण की पत्नी बसंतीबाई व जगदीश की पत्नी कलाबाई भी घर लौट आई थी। बसंतीबाई ने जगदीश से पूछा कि तुम्हारे भैया लक्ष्मण कहां है?  तो उसने कहा था कि जब वह खेत से घर आया तो भैया लक्ष्मण और दोनों भतीजे विशाल व पुष्कर उसे नहीं दिखे। इसके बाद जगदीश ने अपनी बुआ शांतिबाई के घर फोन कॉल कर पूछा तो पता चला कि, वे तीनों वहां पर भी नहीं गए है। यह जानकारी मिलने के बाद जगदीश ने लक्ष्मण व उसके पुत्रों की गांव में और आसपास तलाश की  और फिर खेत की तरफ ढूंढने गया तो उसने देखा कि सुबह पानी की जो मोटर कुएं से बाहर निकालकर कुएं के पास रखी थी, वह नहीं दिखी। उसे शंका हुई कि बड़ा भाई लक्ष्मण लक्ष्मण मोटर के साथ कुएं में तो नहीं गिरा है। उसने अन्य परिजन व गांव के कुछ लोगों को वहां बुलाया तथा कुएं में कूदकर देखा तो उसके पैरों पर कुछ अड़ा, उसने अंदर देखा तो उसे उसके भाई लक्ष्मण और दोनों भतीजों के शव दिखाई दिए। तब उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की मदद से तीनों के शव बाहर निकाले तो वे रस्सी से मोटर से बंधे हुए थे।
              रस्सी से तीनों के शव पानी की मोटर
                 से बांधकर कुएं में फेंक दिए थे
       किसान लक्ष्मण व उसके पुत्रों की हत्या की खबर गांव व आसपास के क्षेत्रों में सनसनी फैल गई थी। तत्कीलन पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी, एपएसएल अधिकारी अतुल मित्तल व अन्य पुलिस अधिकारियों ने घटना स्थल पहुंचकर जांच शुरू की थी। पुलिस ने जांच में पाया था कि लक्ष्मण भाभर व उसके दोनों बच्चों की हत्या जमीन व कुएं से सिंचाई करने के विवाद में उसके रिश्तेदार आरोपी 55 वर्षीय पूंजा उर्फ पूनमचंद भाभर पिता नागू भाभर, पड़ोसी खेत वाले 38 वर्षीय पीरू खराड़ी पिता रूपा खराड़ी, इसके भाई 27 वर्षीय दिलीप उर्फ दीपू खराड़ी उर्फ धुलेसिंह खराड़ी, मां 55 वर्षीय रुपली बाई खराड़ी और साथी  58 वर्षीय फूलजी गामड़ पिता नानजी गामड़ तथा 25 वर्षीय कमलेश उर्फ कमल पिता फूलजी गामड़ निवासी ग्राम देवरूंडा ने मिलकर की थी। हत्या करने के बाद आरोपियों ने सबूत नष्ट करने के उद्देश्य से तीनों के शव पानी की मोटर से रस्सी से बांध दिए थे तथा उन्हें कुएं में फेंक दिया था। जांच के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया था, जहां सुनवाई के बाद उन्हें सजा सुनाई गई। प्रकरण में शासन की तरफ से पैरवी विशेष लोक अभियोजक व सहायक जिला अभियोजन अधिकारी गोल्डन राय ने की।
                    यह था विवाद
     किसान लक्ष्मण भाभर और उसके दूर के रिश्ते के काका आरोपी पूनमचंद उर्फ पूंजा भाभर के बीच जमीन को लेकर कई वर्षों से विवाद चल रहा था। वहीं लक्ष्मण का उसके पड़ोसी खेत वाले आरोपी पीरू खराड़ी व इसके परिवारवालों से खेत के पास स्थित सरकारी कुएं (पानी का बड़ा गड्ढा) से खेत में पानी पिलाने (सिंचाई) को लेकर भी विवाद था। इन विवादों के चलते ही अभियुक्तों ने हत्यकांड को अंजाम दिया था। पुलिस प्रशासन द्वारा प्रकरण पांच वर्ष पुराने चिन्हित, जघन्य व सनसनीखेज श्रेणी में रखा गया था।