अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब्दुल कादिर ने किया कमाल, दुबई के एशियन यूथ पैरा गेम्स में तीन गोल्ड सहित चार मैडल जीते
- बचपन में हुए हादसे में दोनों हाथ खोने के बाद भी बुलंद इरादों से बड़ा आगे, युवा अवस्था मे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना स्विमिंग चैंपियन
✍सर्च इंडिया न्यूज,रतलाम।
दोनों हाथ नहीं फिर भी तैराकी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता का परचम लहराना कोई आसान बात नहीं है। बावजूद इसके रतलाम के 18 वर्षीय दिव्यांग युवक अब्दुल कादिर ने अपने हौंसले के बल पर दुबई में आयोजित एशियन यूथ पैरा गेम्स -2025 में तैराकी के एक नहीं चार इवेंट में शानदार प्रदर्शन कर तीन गोल्ड व एक ब्राज मैडल जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने एशियन गेम्स में चार पदक जीतकर रतलाम, मध्यप्रदेश और भारत का नाम दुनिया में रोशन किया है। राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पदक जीतकर रतलाम और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करने वाले रतलाम के दिव्यांग तैराक अब्दुल कादिर की पहचान अब दुनिया में बेहतरीन तैराक के रूप में हो गई है।
जानकारी के अनुसार रतलाम की कलीमी कालोनी के रहने वाले अब्दुल कादिर ने दुबई में आयोजित एशियन यूथ पैरा गेम्स के 50 मीटर बटरफ्लाई तथा 50 मीटर ही बैकस्टोक और 100 मीटर फ्री स्टाईल इवेंट में शानदार प्रदर्शन कर पहला स्थान प्राप्त करते हुए गोल्ड मैडल जीते। वहीं अब्दुल कादिर ने 50 मीटर बटर फ्लाई इंवेंट में तीसरा स्थान प्राप्त कर ब्रांज मैडल भी जीता। अब्दुल कादिर के कोच राजा राठौड़ ने मीडियाकर्मियों से चर्चा करते हुए बताया कि करीब छह वर्ष की आयु में एक हादसे में अब्दुल कादिर अपने दोनों हाथ खो चुका था। इसके बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी और एक वर्ष बाद वह उनके पास तैराकी का प्रशिक्षण लेने आने लगा। कुछ ही दिनों में वह अच्छा तैराक बन गया और फिर प्रतियोगिताओं में भाग लेते हुए वह सफलता के परचम लहराने लगा। दुबई में पांचवा यूथ एसिशन गेम्स था, इसमें 18 वर्ष तक के बच्चे भाग ले सकते है। खिलाड़ियों की ट्रायल ग्वालियर में हुई थी, उममें देशभर के बच्चे आए थे और उनमें से अब्दुल कादिर सहित पांच-छह तैराकों को चयन दुबई एशियन यूथ पैरा गेम्स-2025 के लिए किया गया था। इसमें विभिन्न इवेंट में अब्दुल कादिर सहित 162 खिलाड़ी विभिन्न खेलों में भाग लेने गए थे। सभी को उम्मीद थी कि अब्दुल इंडिया का नाम रोशन करेंगा, उसने चार पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। अब्दुल आगे बड़े खिलाड़ियों के ओलंपिक और एशियन गेम्स खेलेंगा। पिछले दिनों अब्दुल कादिर ने वर्ल्ड चेम्पियनशिप में भी भाग लिया था, जिसमें ओलंपिक में चार-चार मैडल जीतने वाले जापान, चीन आदि देशों को तैराक आए थे, उनके साथ अब्दुल कादिर ने शानदार तैराकी कर नौंवी रेंक हासिल की थी।
खेलते समय करंट लगने से हुआ था हादसा
वर्ष 2014 में अब्दुल कादिर घर की छत पर खेल रहा था, तभी हाईटेंशन लाइन के तारों की चपेट में आने से उसे जोरदार करंट लगा था। इस हादसे में उसके दोनों हाथ बुरी तरह जख्मी हो गए थे तथा उन्हें शरीर से अलग करना पड़े थे। दोनों हाथ गंवाने के बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी और बुलंद हौंसलों के साथ आगे बढ़ने की ठानी और तैराकी जैसा मुश्किल खेल चुना। कुछ समय ही वह कोच राजा राठौड़ के मार्गदर्शन में अच्छा तैराक बन गया। वह दुबाई की प्रतियोगिता के पहले पैरा स्पोर्ट्स की स्टेट व नेशनल स्पर्धा में 17 गोल्ड और 3 सिल्वर मैडल जीत चुका है। करंट से दोनों हाथ गंवाने के हादसे को भूलकर अब्दुल श्रेष्ठ तैराक बनकर यह बता चुका है कि बुलंद हौंसले व हिम्मत से सफलता प्राप्त की जा सकती है। हादसे के बाद घर-परिवार के लोग निराश थे लेकिन शायद ही किसी को अंदाजा रहा होगा कि एक दिन उनका अब्दुल कादिर अपने जज्बे से अपना, परिवार व देश का नाम दुनिया में रोशन करेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार सफलता हासिल कर अब्दुल कादिर आज स्विमिंग चैंपियन हैं।