रतलाम से नागदा तक नई रेल लाइन डलेगी, भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों ने किया प्रदर्शन, डीआरएम को सौंपा ज्ञापन
- दस गांवों किसान पहुंचे रतलाम, नेहरू स्टेडियम से निकाली रैली, नागदा से रतलाम के मध्य नई रेल लाइन के लिए भूमि सर्वे पुन: करने की मांग
✍ सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम।
मुंबई-दिल्ली रेल लाइन पर स्थित महत्वपूर्ण जंक्शन रतलाम से नागदा के मध्य करीब 41 किलोमीटर लंबी नई तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी। इसके लिए इस लाइन के क्षेत्र में आने वाले कई गांवों की जमीन अधिकृत की जाएगी। प्रस्तावित जमीन अधिकृत की खबर ने किसानों की चिंता बड़ा दी है और उन्होंने जमीन के अधिग्रहण का विरोध शुरू कर दिया। शुक्रवार दोपहर करीब दस गांवों के किसानों ने डीआरएम आफिस (मंडल रेल कार्यालय) में प्रदर्शन कर डीआरएम अश्वनी कुमार को ज्ञापन सौंपकर सर्वे का पुनः परीक्षण कराने की मांग की।
उज्जैन जिले के नागदा, खाचरोद और रतलाम ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न गांवों से होकर नई रेल लाइन डाली जाएगी। ग्राम दीपाखेड़ी, पानवसा, थड़ौदा, रुनखेड़ा, भुवासा, कनवास, खाचरोद, घूडावण, भारटखेड़ी, बुरानाबाद, विरियाखेड़ी, बेड़ावन्या, उमरानी, नरेडीपता, ऊंचाहेड़ा आदि जगह के किसान बड़ी संख्या में शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे नेहरू स्टेडियम पहुंचे। वहां से रैली निकालकर वे डीआरएम कार्यालय गए और नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इस दौरान किसान जमीन पर बैठ गए और नारेबाजी करते रहे। सूचना मिलने पर कुछ देर बाद डीआरएम अश्वनी कुमार किसानों के बीच पहुंचे तथा उनकी बात सुनी। इस दौरान किसानों ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर बताया कि नागदा से रतलाम के बीच नई रेल लाइन बिछाने के लिए रेलवे द्वारा जिन भूमियों का अधिग्रहण किया जा रहा है, उनमें से अधिकतर स्थानों पर अत्यंत उपजाऊ भूमि होकर किसानों की जीविका का मुख्य आधार है। वर्तमान सर्वे में जिन खेतों को अधिग्रहण में लिया जा रहा है, वे आर्थिक दृष्टि से कीमती एवं उत्पादक भूमि है। उक्त भूमियों पर सैकड़ों किसान परिवार खेती पर निर्भर हैं। दीपा खेड़ी क्षेत्र में जो ओवर ब्रिज का निर्माण प्रस्तावित है, उससे भी बड़ी संख्या में किसान प्रभावित हो रहे हैं। इस निर्माण के कारण व्यापक भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिसे पुनः विचार कर निरस्त किया जाए। ताकि अनावश्यक रूप से अधिक भूमि अधिग्रहित न हो।
पहले से अधिकृत जमीन का उपयोग करे
किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि नई रेल लाइन को वर्तमान पुरानी लाइन के समीप से ही निकाला जाना चाहिए। दो नई लाइन बिछाना यदि आवश्यक हों, तो पुरानी लाइन के दोनों ओर से वर्तमान नई रेल लाइन निकाली जा सकती हैं। ऐसा करने से पूर्व से अधिकृत रेलवे भूमि का उचित उपयोग हो जाएगा तथा किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि बच जाएगी। ऐसा करने से सैकड़ों किसानों का आजीविका संकट नहीं होगा तथा भूमि अधिग्रहण का दायरा भी कम हो जाएगा। ज्ञापन में मांग की गई है कि वर्तमान सर्वे का पुनः परीक्षण कराया जाए, किसानों की उपजाऊ भूमि को अधिग्रहण से बचाया जाए, ओवर ब्रिज जैसे प्रस्तावों पर पुनर्विचार कर उन्हें निरस्त किया जाए तथा जिन किसानों की भूमि, घर अधिग्रहित किए जा रहे है उन्हें उचित पुनर्वास, नौकरी, अथवा स्थायी पुनर्स्थापना की व्यवस्था प्रदान की जाए।
जितनी जरूरत होगी, उतनी ही ली जाएगी
डीआरएम अश्वनी कुमार ने किसानों से चर्चा करते हुए कहा कि जितनी जरूरत होगी, उतनी है जमीन ली जाएगी। आपने देखा है कि जितने विकास कार्य होते है, उनके लिए जमीन की जरूरत तो होती है। सड़के बनती है, फैक्ट्रिया डलती है, नई रेल लाइन डाली जाती है, उनके लिए जमीन की जरूरत होती है। आप निश्चित रहे, जितनी जरूरत होगी, उतनी ही जमीन ली जाएगी। आपने कहा कि जो पुरानी रेल लाइन है, उसके साथ नई लाइन बिछाने की कोशिश की जाएगी, अभी सर्वे हुआ है और स्रर्वे में कई रास्ते देखे जाते है। उसके आधार पर फायनल किया जाएगा कि क्या रास्तो होना चाहिए नई ट्रेक का। आप यह भी मानकर चले कि नया ट्रेक बनोगा तो आपके लिए भी अच्छा होगा। सभी मुद्दों पर विचार किया जाएगा।