वृद्धा की हत्या करने पर आरोपी को आजीवन कारावास की सजा, नींद खुलने पर किया था हमला

------------------------------------------

वृद्धा की हत्या करने पर आरोपी को आजीवन कारावास की सजा, नींद खुलने पर किया था हमला
-----------------------------------------------------------------------

सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम ।
न्यायालय ने दीनदयाल नगर थाना क्षेत्र के मोतीनगर में करीब दो वर्ष पहले की गई वृद्धा की हत्या के मामले में अभियुक्त 35 वर्षीय वीरजी भाभर उर्फ वीर सिंह पिता प्रेम भाभर निवासी ग्राम केदारगढ़ हाल मुकाम स्थानीय शंकरगढ़ को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर इस धारा में 5 हजार रूपए का जुर्माना भी किया गया। फैसला गुरुवार को तृतीय सत्र न्यायाधीश बरखा दिनकर ने सुनाया। 
     अपर लोक अभियोजक सतीश त्रिपाठी ने बताया कि 70 वर्षीय भूरीबाई निवासी मोतीनगर के बेटे का निधन हो गया था। बेटे के निधन के कुछ समय बाद उन्होंने  आरोपी वीरजी भाभर पिता प्रेम भाभर निवासी ग्राम केदारगढ़ हाल मुकाम स्थानीय शंकरगढ़ को अपना बेटा बनाकर उसका नातरा  (शादी) अपनी  विधवा बहू से करा दिया था।  शादी के बाद कुछ दिन तक वीरजी पत्नी के साथ भूरीबाई के घर पर ही रहा। वह भूरीबाई का मकान हड़पना चाहता था, इस कारण विवाद करने लगा और दूसरी जगह जाकर अलग रहने लगा। वीरजी भाभर 3 मार्च 2024 की रात भूरी बाई के घर मे घुस गया था और उनकी रुपयों की थैली चुराकर ले जा रहा था।  तभी भूरी बाई की नींद खुल गई थी और उन्होंने वीरजी को देखा लिया था। इस दौरान  वीरजी ने लाठी से हमला कर भूरीबाई की हत्या कर दी थी तथा रुपयों की थैली ले गया था।  सुबह भूरीबाई घर मे मृत मिली थी। पुलिस ने हत्या का प्रकरण दर्ज कर वीरजी को गिरफ्तार कर लिया था। विवेचना के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया था, जहां सुनवाई के बाद उसे सजा सुनाई। वीरजी भाभर को धारा 457 में 5 वर्ष के कारावास व दो हजार रुपए का जुर्माना तथा धारा 392 में 10 वर्ष के कारावास की सजा व दो हजार रुपए का जुर्माना से भी दंडित किया गया। सभी सजा साथ चलेगी। प्रकरण में शासन की तरफ से पैरवी अपर लोक अभियोजक सतीश त्रिपाठी ने की।