नागदा-मथुरा, गुंतकल-वाडी और बुढवल-सीतापुर तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना स्वीकृत, रेल नेटवर्क में करीब 901 किलोमीटर का होगा इजाफा
- इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 23,437 करोड़ रुपये है और ये वर्ष 2030-31 तक पूरी हो होगी
✍ आरिफ क़ुरैशी/सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने हाल ही में मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के 19 जिलों को शामिल करने वाली तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को स्वीकृति दी। इससे भारतीय रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में करीब 901 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 23,437 करोड़ रुपये है और ये वर्ष 2030-31 तक पूरी हो जाएंगी।
रतलाम रेल मंडल के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी प्रेस रीलिज के अनासर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने 05 मई 2026 को रेल मंत्रालय की लगभग 23,437 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली तीन परियोजनाओं को स्वीकृति दे दी। इन परियोजनाओं नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना भी शामिल है। वहीं दो अन्य परियोजना गुंतकल-वाडी तीसरी और चौथी लाइन और बुढवल-सीतापुर तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना है। इन परियोजना के पूर्ण होने से रेल लाइन की क्षमता में वृद्धि से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। इस बहु-ट्रैकिंग प्रस्ताव से परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने में उल्लेखनीय सुधार होगा। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नए भारत की परिकल्पना के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
रेल लाइन की क्षमता में वृद्धि से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। इस बहु-ट्रैकिंग प्रस्ताव से परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने में उल्लेखनीय सुधार होगा। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नए भारत की परिकल्पना के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।
विभिन्न राज्यों के 19 जिलों में फैली है तीनों परियोजनाएं
मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के 19 जिलों में फैली इन तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर तक की वृद्धि होगी। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 4,161 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 83 लाख है। प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, तेल, लोहा और इस्पात, लौह अयस्क, कंटेनर, उर्वरक आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप प्रति वर्ष लगभग 60 मिलियन टन माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने में सहायता करेगी, तेल आयात (37 करोड़ लीटर) को कम करेगी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (185 करोड़ किलोग्राम) को कम करेगा, जो 7 करोड़ पौधारोपण के बराबर है।
कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में होगा सुधार
प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से महाकालेश्वर, रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान, कुनो राष्ट्रीय उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम (श्री राघवेंद्र स्वामी मठ), श्री नेटिकंती अंजनेय स्वामी वारी मंदिर (कासापुरम), श्यामनाथ मंदिर, नैमिषारण्य (नीमसर) आदि सहित देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा।
नागदा-मथुरा तीसरी-चौथी रेल लाइन परियोजना
नागदा-मथुरा तीसरी व चौथी रेल लाइन परियोजना रतलाम, कोटा और आगरा रेल मंडल के लिए विशेष रूप से अहम मानी जा रही है। नागदा-मथुरा मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना मध्य प्रदेश और राजस्थान से होकर गुजरेगी और इसकी लंबाई करीब 568 किलोमीटर है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार देश के प्रमुख और व्यस्त दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर स्थित नागदा से मथुरा तक तीसरी व चौथी लाइन बिछने से रेल यातायात क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा। इससे यात्रियों को अधिक समयबद्ध और बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। इस परियोजना के पूरा होने से कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, लौह-इस्पात और उर्वरक सहित अन्य वस्तुओं के परिवहन में सुगमता आएगी। वहीं रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और मथुरा-वृंदावन जैसे पर्यटन स्थलों का रेल संपर्क भी मजबूत होगा। परियोजना को स्वीकृति मिलने के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि इस अहम परियोजना से उज्जैन में बाबा महाकालेश्वर, कूनो राष्ट्रीय उद्यान सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क और सशक्त होगा। इससे न सिर्फ पर्यटन बल्कि लॉजिस्टिक्स और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
गुंतकल-वाड़ी तीसरी व चौथी रेल लाइन परियोजना
गुंतकल-वाडी तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना मुंबई-चैन्नई उच्च घनत्व रेल नेटवर्क का हिस्सा है। इससे भारतीय रेलवे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को कई महत्वपूर्ण फायदे होंगे। गुंतकल-वाड़ी रेल लाइन की लंबाई करीब 228 किलोमीटर है। तीसरी व चौथी लाइन होने से मालगाड़ी और यात्री गाड़ियों के लिए अलग-अलग रास्ते उपलब्ध होंगे, जिससे ट्रेनों की गति बढ़ेगी और देरी कम होगी। माल ढुलाई क्षमता में भारी इजाफा होगा तथा कोयला, सीमेंट, खाद्य अनाज, उर्वरक और स्टील के परिवहन में तेजी आएगी। इस परियोजना से कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई जिले लाभान्वित होंगे। रायचूर, यादगीर, कलबुर्गी (कर्नाटक), अनंतपुर, करनूल (आंध्र प्रदेश), और नारायणपेठ (तेलंगाना) जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
बुढवल-सीतापुर तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना
दिल्ली-गुहावटी रेल मार्ग के उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और सीतापुर जिलों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मौजूदा व्यस्त लाइन पर ट्रेनों का लोड कम होगा, जिससे ट्रेनों की देरी कम होगी। परियोजना के तहत करीब 103 किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा और इस परियोजना से कोयला, सीमेंट, उर्वरक और खाद्यान्न के परिवहन की क्षमता बढ़ेगी, जिससे स्थानीय उद्योगों को लाभ होगा। इस परियोजना में 09 बड़े पुलों का निर्माण शामिल है, जो बुनियादी ढांचे को और मजबूत बनाएंगे। तीसरी और चौथी लाइन बनने के बाद ट्रेनों का संचलन तो आसान होगा ही गति भी बढ़ जाएगी। साथ ही उत्तर प्रदेश की रामनगर तहसील का बुढ़वल रेलवे स्टेशन इस परियोजना में अहम माना जा रहा है, क्योंकि यहां से गोंडा के साथ सीतापुर के लिए भी रेलमार्ग जुड़ा है। रामनगर के 76, सूरतगंज के 50 व फतेहपुर के 70 गांवों को परियोजना से लाभ मिलेगा। लोधेश्वर महादेवा, किंतूर व पारिजात जैसे धार्मिक व पर्यटन के केंद्रों को रेल सेवा की सीधी कनेक्टविटी मिलेगी।