रतलाम में फिर गर्मी का कहर, 2 दिन बाद तापमान वापस 44 डिग्री पर पहुंचा

- दिनभर रहा लू का प्रकोप, दो दिन से रात के तापमान में भी हो रहा इजाफा,

रतलाम में फिर गर्मी का कहर, 2 दिन बाद तापमान वापस 44 डिग्री पर पहुंचा
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✍  सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम।   
पिछले दो दिन से मध्य प्रदेश के रतलाम सहित अनेक शहरों में तापमान बढ़ रहा है। गर्मी के जोर पक़ड़ने से तापमान में इजाफा हो रहा है। रतलाम में दो दिन पहले 07 मई 2026 को अधिकतम तापमान (दिन का) 41.6 डिग्री था तो 08 मई से गर्मी ने जोर पकड़ा और 08 मई को अधिकतम तापमान बढ़कर 43.5 डिग्री हो गया। वहीं 09 मई को रतलाम में पारा 44 डिग्री पर पहुंच गया। इस प्रकार दो दिन रतलाम में ढ़ाई डिग्री तापमान की वृद्धि हुई है। गर्मी बढ़ने के साथ ही दो दिन से रतलाम में लू का असर रहा और दिन भर गर्म हवा चलती रही।

     गर्मी बढ़ने का सामान्य जनजीवन पर असर रहा और दोपहर में 12 से शाम पांच बजे तक सड़कों पर अन्य दिनों की बजाये आवाजाही कम रही। रतलाम में वैसे अप्रैल में तापमान 40 से 43 डिग्री के आसपास रहता है लेकिन इस वर्ष अप्रैल में भी गर्मी ज्यादा रही और अधिकतम तापमान 44 डिग्री के पार तक पहुंच गया। अप्रैल माह में 18 अप्रैल को 44 डिग्री और 27 अप्रैल को भी 44 डिग्री तापमान रहा था। इससे लगता था कि मई माह में गर्मी का कहर बढ़ेगा और मई माह के दूसरे सप्ताह से ही गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। हालाकि कि मई माह के पहले सप्ताह में 01 से 07 मई तक तापमान में कमी आई और अधिकतम तापमान 41 से 42 डिग्री के आसपास रहा लेकिन दूसरा सप्ताह लगते ही गर्मी ने असर दिखाना शुरू कर दिया। 08 मई को अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री तो 09 मई को अधिकतम तापमान 44 डिग्री पर पहुंच गया। मई माह में पहली बार तापमान 44 डिग्री पर पहुंचा है, आगे और गर्मी तेज होने की संभावना है।
                  रातें भी गर्म होने लगी
      वैसे मालवा की रातें ठंडी होती है लेकिन इस बार रात में भी गर्मी का असर देखा जा रहा है और रात के तापमान में भी इजाफा हो रहा है। 06 मई को जहां न्यूनतम तापमान (रात का) 24.6 डिग्री, 07 मई को 25 डिग्री, 08 मई को 25.6 डिग्री रहा था तो 09 मई को न्यूनतम तापमान 26.2 डिग्री पर पहुंच गया। गर्मी बढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ गई और तपिश के चलते लोग परेशान नजर आए। दिन में अधिकांश लोग घरों में ही कैद रहे और जो जरूरी कार्यों से बाहर निकले व तेज धूप व लू से बचाव के साधनों का इस्तेमाल करते रहे।