डिजिटल अरेस्ट मामला : युवती सहित तीन और आरोपी गिरफ्तार, जम्मू, असम व पंजाब के हैं रहने वाले
-रिटायर्ड प्रोफेसर को 28 दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर की गई थी 1.34 करोड 50 लाख रुपए की ठगी
✍सर्च इंडिया न्यूज,रतलाम ।
दीनदयाल नगर पुलिस ने शहर के एक रिटाय़र्ड प्रोफेसर को गंभीर केस में फंसाने की धमकी देकर 28 दिन तक डिजिटर अरेस्ट रखकर 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपए की ठगी करने के मामले में आरोपी 27 वर्षीय मोहन काबरा पिता रुघनाथ काबरा निवासी 20-ई शिव अपार्टमेंट, एनके रोड, बादल कॉलोनी, जिला मोहाली (पंजाब), 30 वर्षीय सुमीरन शर्मा पिता स्वामी प्रसाद शर्मा निवासी वार्ड नं. 07 आर्य समाज मोहल्ला, अखनूर, जिला जम्मू (जम्मू-कश्मीर) और 37 वर्षीय सुरेश रजक पिता गणेश रजक निवासी धुलिया जान सोनापुर जिला डिब्रूगढ़ (असम) को भी गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार मामले में करीब तीन सप्ताह पहले आरोपी अशोक जायसवाल पिता राधेश्याम जायसवाल, सनी जयसवाल पिता सोनू जायसवाल, सारांश तिवारी उर्फ शानू पिता योगेंद्र तिवारी व एक नाबालिग लड़के तथा नीमच जिले से पवन कुमावत पिता कैलाश कुमावत निवासी इंद्रा कॉलोनी नयागांव थाना जावद जिला नीमच, उत्तरप्रदेश के गोरखपुर से एनजीओ संचालक अमरेंद्र कुमार मौर्य पिता बड़ेलाल प्रसाद मौर्य निवासी गोरखपुर तथा गुजरात के जामनगर से आरोपी आरिफ घाटा, हमीद खान पठान, शाहिद कुरैशी व सादिक हसन समा निवासी जामनगर व राजेश कुमार निवासी ग्राम अंबारी थाना रघुनाथपुर जिला सिवान (बिहार) को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में पता चला था कि साइबर ठगी के इस गिरोह में आरोपी मुकेश काबरा, सुरेश रजक, सुमीरन शर्मा व अन्य आरोपी भी शामिल है। एसपी अमित कुमार के निर्देशन व एएसपी (रतलाम शहर) राकेश खाखा के मार्गर्दशन में पुलिस टीम फरार आरोपियों की तलाश में दबिशें दे रही थी। दबिशों के दौरान आरोपी मुकेश काबरा, सुरेश रजक व सुमीरन को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया। शेष आरोपियों की तलाश में टीम अलग-अलग राज्यों में भेजी गई है।
मोहन ने खुलवाए थे खाते, सुमीरन भेजती थी फाइल
पुलिस के अनुसार आरोपी मोहन ने मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी अमरेंद्र से मिलकर उसके नाम से बैंक खाते खुलवाए थे तथा उनका उपयोग ठगी की राशि के ट्रांजेक्शन में किया था। आरोपी अमरेंद्र कमीशन पर खाता मोहन को देने के लिए सुरेश के साथ गुवाहाटी गया था। मोहन ने अमरेंद्र को कमीशन का लालच देकर उसके खाते का उपयोग फ्रॉड में किया। मोहन द्वारा अमरेंद्र व अन्य खातों के माध्यम से लगभग दो करोड़ रुपए के फ्रॉड ट्रांजक्शन कराए गए। महिला आरोपी सुमीरन ने पूर्व में गिरफ्तार किए गए आरोपी शानू के साथ मिलकर ठगी की राशि को अपने खाते से आगे ट्रांसफर किया था। सुमीरन टेलीग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से apk फाइल भेज कर अकाउंट का एक्सेस लेकर फ्रॉड करती थी। इन तीनों आरोपियों की भूमिका से यह स्पष्ट हुआ कि यह एक संगठित, अंतरराज्यीय एवं तकनीकी रूप से संचालित साइबर गिरोह है। मामले में कुछ और आरोपी फरार है, जिनकी तलाश में टीमें भेजी गई है।
यह है मामला
रिटार्यड प्रोफेसर को 15 नवंबर 2025 को अज्ञात व्यक्ति ने फोन कॉल कर कहा था कि वह मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बोल रहा है, आपके (रिटायर्ड प्रोफेसर) नाम से जारी मोबाइल फोन की सिम का उपयोग एक बड़े फ्राड में हुआ है तथा मुंबई स्थित केनरा बैंक में करीब 247 रुपए की मनी लांड्रिंग की गई है। उसने रिटार्यड प्रोफेसर को गंभीर अपराध में गिरफ्तार करने का डर दिखाकर उनसे उनके बैंक खातों, आधार कार्ड आदि की जानकारी ली गई तथा वाट्सएप पर आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज मंगवाए गए। इस दौरान जब आरोपियों को पता चला कि रिटायर्ड प्रोफेसर का बेटा कनाडा में है तो उसे गिरफ्तार करने तथा भारत नहीं आने का डर दिखाकर रुपयों की मांग की गई थी। इस प्रकार उन्हें 15 नवंबर से 12 दिसंबर 2025 तक डिजीटल अरेस्ट कर रखाकर आरोपियों ने 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपए की ठगी की थी।
इनकी रही भूमिका
आरोपी मोहन काबरा, सुरेश रजक व सुमीरन शर्मा को गिरफ्तार करने में निरीक्षक अमित कोरी, निरीक्षक लिलियन मालवीय, दीनदयाल नगर थाना प्रभारी (एसआई) अनुराग यादव, एसआई जीवन बरिया व प्रवीण वास्कले, आरक्षक तुषार सिसोदिया, मोरसिंह डामोर, पवन जाट की सराहनीय भूमिका रही।