रिटायर्ड प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट कर 1.34 करोड़ रुपए ठगे, उत्तरप्रदेश, गुजरात, बिहार, जबलपुर व नीमच से 11 आरोपी गिरफ्तार

- 28 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर रखा, असम, बिहार, उत्तरप्रदेश, कश्मीर, गुजरात, कंबोड़िया तक जुड़े हैं तार,

 सर्च इंडिया न्यूजरतलाम
शहर के दीनदयाल नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले एक रिटायर्ड प्रोफेसर को सायबरों ठगों द्वारा उनके पुत्र की कनाडा में गिरफ्तारी होना बताकर 28 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपए की ठगने का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों का पता लगाकर उनकी धरपकड़ शुरू की। अब तक उत्तरप्रदेश, बिहार, गुजराज, जबलपुर व नीमच जिले से एक नाबालिग लड़के सहित 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले के तार कश्मीर, असम, बिहार, गुजरात, उत्तरप्रदेश से लेकर कंबोड़िया व कनाडा से जुड़े पाए गए है। मामले में और अन्य आरोपियों की तलाश में गुजरात, बिहार व अन्य राज्यों में पुलिस टीमें भेजी गई है।

    एसपी अमित कुमार ने मंगलवार शाम एसपी आफिस में आयोजित पत्रकारवार्ता में सायबर ठगी के अंतरराज्यीय मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 15 नवंबर 2025 को रिटायर्ड प्रोफेसर को अज्ञात व्यक्ति ने फोन कॉल कर स्वयं को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए कहा कि है, आपके नाम जारी मोबाइल फोन सिम का उपयोग एक बड़े फ्राड में हुआ है तथा मुंबई स्थित केनरा बैंक में करीब 247 रुपए की मनी लांड्रिंग की गई है। उन्हें गंभीर अपराध में गिरफ्तार करने का डर दिखाकर उनसे उनके बैंक खातों, आधार कार्ड आदि की जानकारी ली गई तथा वाट्सएप पर आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज मंगवाए गए। इस दौरान जब आरोपियों को पता चला कि रिटायर्ड प्रोफेसर का बेटा कनाडा है तो उसे गिरफ्तार करने तथा भारत नहीं आने का डर दिखाकर रुपयों की मांग की गई। इस प्रकार उन्हें 15 नवंबर से 12 दिसंबर 2025 तक डिजीटल अरेस्ट कर रखा गया तथा मामला किसी को नहीं बताने की धमकी दी गई। उनकी आए दिन कनाडा में बेटे से बात होती थी तथा वे घर से बाहर आते-जाते भी रहे लेकिन डर के कारण उन्होंने मामले की जानकारी अपने बेटे व परिवार के अन्य सदस्यों को भी नहीं दी तथा आरोपियों की मांग पर उनके द्वारा बताए गए बैंक खाते में टूकड़ों-टूकड़ों में रुपए भेजते रहे। उनके मोबाइल फोन में सिंगल एप इंस्टॉल कराया गया तथा वीडियो कॉल के दौरान न्यायालय जैसा सेटअप, जज, वकील व गवाहों का नाटकीय दृश्य दिखाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा गया और उनकी संपत्ति व बैंक खातों की जानकारी लेकर ब्लैकमेल करते हुए उनसे कुल 1 करोड़ 34 लाख 50 रुपए की ठगी की गई।
                    इन आरोपियों को किया गिरफ्तार
   एसपी अमित कुमार ने बताया कि अब तक जबलपुर से आरोपी 61 वर्षीय अशोक जायसवाल पिता राधेश्याम जायसवाल, 34 वर्षीय सनी जयसवाल पिता सोनू जायसवाल, 18 वर्षीय सारांश तिवारी उर्फ शानू पिता योगेंद्र तिवारी व एक नाबालिग लड़के तथा नीमच जिले से आरोपी 23 वर्षीय पवन कुमावत पिता कैलाश कुमावत निवासी इंद्रा कॉलोनी नयागांव थाना जावद जिला नीमच को गिरफ्तार किया गया है। वहीं उत्तरप्रदेश के गोरखपुर से एनजीओ संचालक आरोपी 34 वर्षीय अमरेंद्र कुमार मौर्य पिता बड़ेलाल प्रसाद मौर्य निवासी गोरखपुर तथा गुजरात के जामनगर से आरोपी आरिफ घाटा, हमीद खान पठान, शाहिद कुरैशी व सादिक हसन समा निवासी जामनगर को गिरफ्तार कर रतलाम लाया जा चुका है। मास्टर माइंड राजेश कुमार निवासी ग्राम अंबारी थाना रघुनाथपुर जिला सिवान (बिहार) को भी टीम ने बिहार से गिरफ्तार कर लिया है, उसे ट्रांजिट रिमांड पर रतलाम लाया जा रहा है। पूछताछ में आरोपियों से गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी मिली है, जिनकी तलाश में बिहार, गुजरात व अन्य स्थानों पर टीम भेजी गई है। रिटायर्ड प्रोफेसल से ठगी गई राशि में से जबलपुर से गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों तथा नीमच के आरोपी के बैंक खाते में 14-14 लाख रुपए ट्रांसफर होना पाया गया है। वहीं गौरखपुर का अमरेंद्र कुमार मौर्य एनजीओ संचालक है और उसने जो आईटच फाउंडेशन बना रखा है, उसके बैंक खाते में 50 लाख रुपए का संदिग्ध लेनदेन पाया गया है। वहीं गुजरात के आरोपियों ने ठगी गई राशि का उपयोग क्रिप्टो करेंसी खरीद कर करीब पांच लाख रुपए का अवैध लाभ अर्जित किया है।
     कंबोड़िया व भारत के अनेक राज्यों से जुड़े हैं तार  
     पुलिस ने शिकायत मिलने पर जांच की तो पता चला कि ठगों ने कंबोडिया के नंबर से वाट्सएप हैक करके रिटायर्ड प्रोफेसर को कॉल किया था और उसके बाद ठगी का खेल शुरू किया। जांच में परते खुलती गई और पुलिस आरोपियों तक पहुंचती गई। इस गिरोह के मुख्य् आरोपियों का पुलिस पता लगा रही है। जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि गिरोह का संचालन कश्मीर की एक लड़की द्वारा किया जा रहा था। उसके कहने पर बिहार के रहने वाले आरोपी असम गए थे और वहां बैठकर ठगी की गई। ठगी का रुपया जामनगर, नीमच, जबलपुर आदि स्थानों के लोगों के फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया तथा रुपए गुजरात के सूरत के आंगड़ियों के माध्यम से विदेशी बैंक खातों में भी किप्टो करैंसी के माध्यम से कंनर्वट भी किए गए। आरोपियों ने कई लोगों को फर्जी खाते खुलवा रखे है और उनमें ठगी की राशि ट्रांसफर करते थे। जबलपुर के आरोपियों ने एक कालोनी के अनेक लोगों के फर्जी बैंक खाते तक खुलवा दिए। वे लोगों के खाते खुलवाकर कमीशन पर उनके खातों का संचालन कर रहे थे।   
               परिचितों से उधार भी लिए रुपए
     सायबर ठगों ने रिटायर्ड प्रोफेसर को इतना डरा दिया था कि वह उनके कहे अनुसार उन्हें रुपया भेजते रहे और अपनी जमा पूंजी खत्म होने पर उन्होंने अपने परिचितों से भी रुपए उधार लेकर आरोपियों को भेजे। उनके बेटे को लगाकार बैंक खाते से रुपए अन्य खातों में ट्रांसफर होने की जानकारी मिलती रही और पिता से पूछता था कि आप रुपए कहां और क्यों ट्रांसफर कर रहे है? लेकिन पिता ने उसे आरोपियों के डर से कोई जानकारी नहीं दी। जब बेटा कनाडा से अपने घर रतलाम पहुंचा और पिता से बातचीत की तो उन्होंने उसे घटना की पूरी जानकारी दी। इसके बाद बेटे ने ई-एफआईआर दर्ज कराई और पिता को लेकर एसपी आफिस पहुंचकर पुलिस को पूरी जानकारी दी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318 (4), 319 (2), 308 और आईटी एक्ट की धारा 66 (सी ) व 66 (डी) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।