अतिक्रमण हटाने के विरोध में चक्काजाम, तीन घंटे बाद चक्काजाम किया खत्म, फिर चले बुलडोजर, अनेक मकान तोड़े
- बिबड़ोद से हटाकर ग्राम लखनगढ़ में की गई लोगों को बसाने की व्यवस्था, समझाइश के बाद किया विरोध खत्म
✍ सर्च इंडिया न्यूज,रतलाम ।
रतलाम-बाजना रोड पर स्थित ग्राम बिबडोद के पास स्थित मेगा इंडस्ट्रियल पार्क (निवेश क्षेत्र) की जमीन से अतिक्रमण हटाने का लोगों ने जमकर विरोध किया। इसके चलते कार्रवाई को रोकना पड़ा और प्रशासन के दल को भारी विरोध का सामना करना पड़ा है। वहां रह रहे 40 परिवारों ने उनके मकान तोड़ने का जमकर विरोध किया और लोग चक्काजाम कर सड़क पर बैठ गए। इससे यातायात ठप्प हो गया। लोगों का कहना था कि उन्हें अन्य दूसरे स्थान पर जहां बसाया जा रहा है, वहां कोई व्यवस्था नहीं है। जंगल मे वे कहां रहेंगे, पहले वहां सारी मूलभूत व्यवस्थाएं की जाए, उसके बाद ही यहां से हटेंगे। सुबह करीब 11 बजे से दोपहर करीब 2 बजे तक चक्काजाम चलता रहा। इसके बाद अधिकारियों की समझाईश पर चक्काजाम समाप्त किया गया। चक्काजाम खत्म होने के बाद बुलडोजर चलाकर मकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई।
बिबड़ोद क्षेत्र में ईंटों का निर्माण करने वाले तथा अन्य कार्य करने वाले करीब 40 परिवार वहां रहते है। पास ही उनके भट्ठे भी स्थित है। क्षेत्र में निवेश क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। सरकारी जमीन पर मकान व ईंट भट्ठे होने से उन्हें हटाना प्रस्तावित था तथा पहले से वहां रह रहे लोगों को वहां से हटने के लिये नोटिस दिए जा चुके थे। इसके बाद भी लोग वहां से नहीं हटे। सोमवार सुबह जिला प्रशासन का दल भारी पुलिस बल व जेसीबी मशीनें लेकर अतिक्रमण हटाने व मकानों को तोड़ने की कार्रवाई करने पहुंचा तथा दो-तीन मकानों को तोड़ा गया था तभी लोग विरोध में उतर आए तथा सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। इससे रतलाम-बाजना मार्ग पर यातायात जाम हो गया और वाहनों की कतारें लग गई। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि वे यहां पिछले 30-40 साल से रह रहे हैं। उनके ईंट भट्ठे भी यहीं है, जिससे उनका रोजगार चलता है। पहले वे रतलाम शहर में अमृत सागर तालाब के किनारे रहकर ईंट बनाते थे। प्रशासन ने वहां से हटाकर उन्हें बिबड़ौद भेजा था। अब यहां से भी उजाड़ा जा रहा है। उन्हें करीब 10 किलोमीटर दूर जंगल मे ग्राम लखनगढ़ के पास शिफ्ट किया जा रहा है, जहां सड़क, पानी, स्कूल अस्पताल आदि मूलभूत सुविधाएं नहीं है, मकान नही है, केवल त्रिपाल लगा दिया गया है। जंगल मे परिवारों के साथ कैसे गुजारा करेंगे। पहले वहां मकान बनाकर दिए जाए। एसडीएम आर्ची हरित ने कहा कि वहां पानी, सुविधाघर, टैंट आदि की व्यवस्था की गई है । धीरे-धीरे सारी व्यवस्थाएं की जाएगी। वहां अपने मकान बना लेना ओर कुछ समय बाद भट्टे भी लगा लेना। अभी भट्ठे नहीं हटा रहे है। इस पर लोगों ने कहा कि उन्हें 3 महीने का समय दिया जाए। लखनगढ़ में सभी को पहले जमीन आवंटित कर पट्टे दिए जाएं ताकि वे सभी जमीन के लिए आपस मे लड़ेंगे नहीं और अपनी -अपनी आवंटित जमीन पर वे खुद मकान बना लेंगे। एसडीएम ने कहा कि अभी यहां से ईंट भट्ठे नहीं हटा रहे है। इस पर लोगों ने कहां कि वहां से यहां आने-जाने में परेशानी होगी, खुली जगह वहां रहने पर जब हम यहां ईंट भट्टो पर काम करने आएंगे तो वहां हमारे सामान की निगरानी कौन करेगा? अभी वहां गेहूँ की फसल लगी है। तीन माह बाद फसल कटने पर हम वहां चले जाएंगे तब तक यहीं रहने दिया जाए।
सरपंच ने विरोध भी किया और समझाइश भी दी
ग्राम पंचायत जुलवानिया के सरपंच छोटू भाभर भी मौके पर पहुंचे तथा लोगो को समझाने का प्रयास करने लगे ओर अधिकारियों से चर्चा की। उनका कहना था कि लोगों को पहले पर्याप्त व्यवस्था करके दी जाए उसके बाद ही अतिक्रमण हटाया जाये। इसी बीच वे गुस्सा हो गए तथा प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहने लगे कि जब हम विरोध पर आएंगे तो फैक्ट्रियां नहीं चलाई जा सकेगी। प्रशासन को भारी पड़ेगी कार्रवाई । वहीं सरपंच भाभर ने लोगों से भी काफी देर तक चर्चा की तथा उन्हें आपस मे एक होकर आगे बढ़ने की समझाइश दी। कुछ देर बाद सभी लोगों ने आपस में चर्चा की और लखनगढ़ शिफ्ट होने को राजी हुए। बाद में लोग माने और चक्काजाम समाप्त किया। इसके बाद प्रशासन के दल ने मकानों को तोड़ने की कार्रवाई पुनः शुरू करवाई। शाम 5 बजे तक करीब 15 मकान को तोड़ दिया गया था।