मेगा इंडस्ट्रियल पार्क  को लेकर फिर विरोध शुरू, सैलाना विधायक, जिला पंचायत उपाध्यक्ष व ग्रामीण धरने पर बैठे

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मेगा इंडस्ट्रियल पार्क  को लेकर फिर विरोध शुरू, सैलाना विधायक, जिला पंचायत उपाध्यक्ष व ग्रामीण धरने पर बैठे

  सर्च इंडिया न्यूजरतलाम।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से लगे रतलाम जिले के पलसोड़ी-रामपुरिया क्षेत्र में बनाए जा रहे औद्योगिक निवेश क्षेत्र (मेगा इंडस्ट्रियल पार्क)  के विरोध को लेकर एक बार फिर ग्रामीण आंदोलन पर उतर आए है। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण ग्राम पलसोड़ी में ग्रीड के पास धरना प्रदर्शन शूरू कर दिया। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार व जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशु निनामा, कांग्रेस नेता चंद्रशेखर शर्मा, लक्ष्मण डिंडोर, पलसोड़ी के सरपंच पति गोरधन, जुलवानिया पंचायत के सरपंच छोटू भाभर आदि भी वहां पहुंचे और ग्रामीमों के साथ धरने पर बैठ गए। सूचना मिलने पर सैलाना एसडीएम तरूण जैन, रतलाम तहसीलदार ऋषभ ठाकुर व अन्य अधिकारी भी पहुंचे तथा धरना दे रहे नेताओं व लोगों के साथ जमीन पर बैठकर चर्चा की लेकिन बात नहीं बनी और धरना दे रहे लोगोँ ने कि जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होगा, धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
     पलसोड़ी-रामपुरिया क्षेत्र के 1500 हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में औदियोगिक निवेश क्षेत्रकेन निर्माण का कार्य किया जा रहा है। इसके तहत क्षेत्र में सड़क, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए निर्माण कार्य किए जा रहे है। वहीं कुछ कंपनियों ने भी अपने निर्माण कार्य शुरू कर दिए है। प्रशासन द्वारा निर्माण कार्य के बीच आने वाले अतिक्रमण हटाए जा है। प्रशासन द्वारा 15 दिसंबर 2025 को निवेश क्षेत्र से लगे बिबडौद में अतिक्रमण में आ रहे करीब 30 मकान व कुछ ईँट भट्टे हटाने की कार्रवाई की थी तो ग्रामीणों ने बाजना रोड पर चक्काजाम कर कार्रवाई का विरोध किया था। उनका कहना था कि  उन्हें कुछ समय तक यहां रहने दिया जाए और जहां बसाया जा रहा है वहां पहले मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया था कि करीब आठ किलोमीटर दूर लखनगढ़ में उनके विस्थापन किया जा रहा है। वहां सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों के आश्वासन पर करीब तीन घंटे बाद चक्कजाम समाप्त किया गया था और फिर प्रशासन ने अतिक्रमण में आ रहे मकानों को तोड़ दिया था। अब निवेश क्षेत्र के लिए पलसोड़ी क्षेत्र में सड़क बनाई जा रही है, जिसका ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण में कई लोगों के घर व जमीन प्रभावित होगी। सड़क गांव के बाहर से बनाई जाए। वहीं पंचायतों द्वारा बगैर अनुमति के क्षेत्र में निर्माण कार्य नहीं करने के लिए लिखित में आवेदन दिया था, उसके बाद भी पंचायत से अनुमति लिए बगैर सड़क बनाई जा रही है।
         मांगे पूरी होने पर किया जाएगा धरना समाप्त
    धरना प्रदर्शन की खबर मिलने पर सैलाना एसडीएम, रतलाम तहसीलदार व अन्य अधिकारी भी वहां पहुंचे तथा धरना दे रहे नेताओं व ग्रामीणों के बीच जाकर नीचे बैठकर उनसे चर्चा की। जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशुराम निनामा ने बताया कि पांच पंचायतों पलसोड़ी, रामपुरिया, बिबड़ौद, जुलवानिया, जामथून क्षेत्र की जमीन इंडस्ट्रियल पार्क  क्षेत्र में आ रही है। कई लोग बेघर हो रहे हैं। पहले ही पंचायतों ने प्रशासन को कहा था कि पंचायतों की अनुमति के बगैर निर्माण कार्य नहीं किए जाए। अब पलसोड़ी में गांव के अंदर से तीन से चार किलोमीटर की सड़क बनाई जा रही है। पंचायत से इसकी अनुमति भी नहीं ली गई। प्रशासन ने पंचायत से अनुमति लेने के संबंध में पहले ली गई आपत्ति पर अभी तक जवाब नहीं दिया है। पलसोड़ी में बनाई जा रही सड़क गांव से बाहर होकर बनाई जाए, ताकि कोई ग्रामीण प्रभावित न हो। सड़क गांव के बाहर से बनाई जाए और पंचायतों की आपत्ति का जवाब दिया जाए, नहीं तो धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
           विधायक डोडियार ने की सुरक्षा बल तैनात
            करने व सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग
     सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कलेक्टर व एसपी को पत्र लिखकर धरना स्थल पर सुरक्षा बल तैनात करने और सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि प्रभावित ग्रामीणों,  विशेषकर आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ ग्राम पलसोड़ी में शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। अनेक परिवार वहां की भूमि पर पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं और उनकी आजीविका पूरी तरह इसी पर निर्भर है, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं होने के कारण उन्हें अतिक्रमणकारी बताया जा रहा है।  बगैर उचित सुनवाई और पुनर्वास के किसी भी प्रकार की बेदखली असंवैधानिक और अमानवीय है। उन्होंने प्रशासन से मेगा इंडस्ट्रियल पार्क की कार्यवाही पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।  साथ ही एसपी से धरना स्थल पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने,  असामाजिक तत्वों पर नजर रखने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अस्थायी सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की है।  उन्होंने कलेक्टर से आदिवासी हित, पर्यावरणीय प्रभाव और सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की अपील की है।