मानसून की विदाई के बाद भी कई जिलों में बारिश का अनुमान, 15 जिलों में 50 इंच से ज्यादा बारिश
गुना में सर्वाधिक 65.67 इंच और शाजापुर में सबसे कम 29.57 इंच हुई बारिश, मंडला, डिंडोरी, बैतुल, हरदा, बुरहानपुर सहित अनेक जिलों में हो सकती है बारिश
✍सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम।
मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई हुए करीब दो सप्ताह हो चुके है, लेकिन दो दिन से मौसम ने पुन: बदलाव आया है और इंदौर व खंडवा में बारिश होने के साथ ही दीपावली के दौरान प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई जा रही है। 18 अक्टूबर को इंदौर व खंडवा में बारिश हुई थी। रतलाम में 19 अक्टूबर को बादल छाए रहे तथा दिन में कुछ समय उमस भी रही। वहीं मौसम विभाग के अनुसार 20 से 22 अक्टूबर के मध्य प्रदेश के मंडला, डिंडोरी, सिवनी, खंडवा, बैतुल, हरदा, बुरहान पुर सहित दक्षिणी क्षेत्र के कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है।
रतलाम सहित मध्यप्रदेश के लगभग हर जिले में इस साल औसत से ज्यादा बारिश हुई है। मानसूत्र सत्र में रतलाम जिले की औसत 36.15 है। वहीं इस वर्ष रतलाम जिले में 49.74 इंच बारिश हुई है। जबकि पिछले वर्ष 46.06 इंच बारिश हुई थी। इसी प्रकार प्रदेश के अन्य जिलों में भी औसत वर्षा से अधिक बारिश दर्ज की गई है। अनेक जिलों में अतिवृष्टि व पीला मौजेक से फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। रतलाम व आसपास के जिलों में सोयाबीन फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है। किसानों को कहना है कि अनेक खेतों में सोयाबीन की 70 प्रतिशत से अधिक फसल खराब हो गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई जिलों का दौरान कर खराब फसलों को देखा था तथा किसानों को राहत देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद शासन द्वारा प्रदेश के हजारों किसानों के खातों में सीधे राहत राशि भी भेजी गई है। वहीं 24 अक्टूबर 2025 से भावंतर योजना भी शुरू की जा रही है, जो 15 जनवरी 2026 तक चलेगी। बड़ी संख्या में किसान पंजीयन भी करा चुके है।
मटर चने की बोवनी की, दीपावली बाद गेहूं की करेंगे
किसान सुरेश पाटीदार निवासी ग्राम धौंसवास ने बताया कि अतिवृष्टि व पीला मौजक से सोयाबीन की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। एक बीघा जमीन में चार से पांच क्विंटल सोयाबीन की फसल होना चाहिए थी लेकिन इस बार 50 किलो से डेढ़ क्विंटल तक ही उत्पादन हुआ है। अधिकांश किसानों ने मटर की बोवनी तथा दस से पंद्रह प्रतिशत किसानों ने चने की बोवनी कर दी है। वहीं शेष किसान दीपावली बाद गेहूं के साथ चने की बोवनी शुरू करेंगे। जिन किसानों ने चने व मटर की बोवनी कर दी है, वे चने व मटर की फसल लेने के बाद दिसंबर में गेहूं की बोवनी भी करेंगे। किसान कैलाश पाटीदार निवासी ग्राम दंतोड़िया ने बताया कि सोयाबीन की फसल अतिवृष्टि से खराब हो गई। कहीं एक बीघा में एक क्विंटल तो कहीं पचास किलो तो कहीं डेढ़ क्विंटल उत्पादन हुआ है। गेहूं की बोवनी के लिए खेत तैयार किए गए है, दीपावली के बाद बोवनी करेंगे।