नरवाई जलाने वाले किसान हो जाएं सावधान, सेटेलाइट के माध्यम की जा रही है निगरानी, 34 मामले आए सामने

-----------------------------------------------

नरवाई जलाने वाले किसान हो जाएं सावधान, सेटेलाइट के माध्यम की जा रही है निगरानी, 34 मामले आए सामने
----------------------------------------------------------------------

  सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम।
प्रशासन द्वारा जिले में खेतों के अंदर नरवाई (पराली) जलाने पर प्रतिबंध लगाने के बाद भी कई किसान पराली जला रहे हैं। नरवाई जलाने वाले किसानों को सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि उनके खेतों पर सेटेलाइन के माध्यम से आसमान से नजर रखी जा रही है। नरवाई जलाते पाए जाने पर संबंधित किसान को जुर्माने के रूप में 2500 रुपए से 15 हजार रुपए तक की कीमत चुकानी पड़ सकती है। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में इस रबी सीजन में 04 अप्रैल तक सेटेलाइन के माध्यम से नरवाई जलाने की 34 घटनाएं दर्ज की गई है। आगे संबंधित खेत मालिकों के खिलाफ जुर्माना किया जाएगा। 
       किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उप संचालक आरके सिंह  ने बताया कि जिले में नरवाई जलाने को लेकर कलेक्टर मिशा सिंह द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेश एवं कृषि एवं कृषि अभियांत्रिकी विभाग के निर्देशानुसार सांझा रूप से आयोजित यंत्रों के प्रदर्शन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से जिले के किसानों को नरवाई जलाने की बजाये नरवाई के प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है  तथा उनसे आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील की जा रही है। उन्होंने बताया कि किसान भाई नरवाई ना जलाकर प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। नरवाई प्रबंधन में उपयोगी कृषि यंत्रों जैसे स्ट्रा रीपर,  मल्चर,  देशी पाटा,  रोटावेटर एवं रिवर्सिबल प्लाऊ की बढ़ती बिक्री इस बात का संकेत है कि रतलाम जिले के किसान नरवाई प्रबंधन की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
                    जुर्माना वसूलने के आदेश
       उप संचालक आरके सिंह   ने बताया कि जिले के कुछ किसान जिला प्रशासन द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन कर नरवाई  जलाने का कृत्य कर रहे हैं, जो कि सेटेलाइट के माध्यम से रिकॉर्ड हो रहा है।  जिले में वर्तमान में 04 अप्रैल 2026 तक कुल 34 घटनाएं दर्ज की गई हैं,  जिनके पंचनामे तैयार कर तहसील स्‍तर पर कार्रवाई के लिए प्रेषित किए गए है। नरवाई जलाने वाले किसानों पर 02 एकड तक 2500 प्रति घटना,  02 से 05 एकड तक की भूमि पर 05 हजार  रुपए प्रति घटना और 05 एकड से अधिक भूमि वाले किसानों पर 15 हजार रुपए प्रति घटना तक आर्थिक दंड वसूलने के आदेश दिए प्रसारित किए गए हैं। उन्होंने किसानों से अपील की है कि किसान नरवाई ना जलाकर नरवाई प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करें तथा जिले में सतत विकास एवं सतत कृषि की अवधारणा को साकार करने के लिए भागीदार बने।
                  नरवाई जलाने के नुकसान
        विशेषज्ञों के अनुसार खेतों में फसल कटाई के बाद बचे अवशेष (नरवाई) में आग लगाने से कई तरह के नुकसान होते हैं। इससे भूमि में उपस्थित सूक्ष्म जीव जलकर नष्ट हो जाते हैं व भूमि बंजर होने लगती है। भूमि में उपलब्ध जैव विविधता समाप्त हो जाती है। भूमि की उपरी परत में ही पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध रहते हैं, आग लगाने के कारण ये पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं। भूमि कठोर हो जाती है, जिसके कारण भूमि की जलधारण क्षमता नष्ट हो जाती है और फसलें जल्दी सूख जाती है। इसके अलावा खेत की सीमा पर लगे पेड़-पौधे, फल वृक्ष आदि को भी नुकसान होता तथा पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ वातावरण में तापमान वृद्धि होती है और भूमि गर्म हो जाती है। इसके अलावा भूमि में कार्बन नाईट्रोजन तथा फास्फोरस का अनुपात कम हो जाता है। भूमि में पाए जाने वाले केंचुए नष्ट हो जाते हैं। इस कारण भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। इसलिए किसान नरवाई न जलाएं बल्कि नरवाई नष्ट करने के लिए रोटावेटर चलाकर नरवाई को बारिक कर मिट्टी में मिला दें। इससे जैविक खाद तैयार होता है। इससे फसल के लिए नैसर्गिंक खाद मिलेगी, जिससे फसल उत्पादन बढ़ेगा। नरवाई जलाने से ना सिर्फ मिट्टी की उर्वरा क्षमता कम होती है बल्कि वायु प्रदूषण का प्रभाव बढ़ जाता है।