वृद्ध की मौत और खून लगी लकड़ी को लेकर दिए तर्क खारिज, हत्या के आरोपी को उम्रकैद की सजा

- फैसला सुनाने के बाद न्यायालय ने भेजा जेल

वृद्ध की मौत और खून लगी लकड़ी को लेकर दिए तर्क खारिज, हत्या के आरोपी को उम्रकैद की सजा
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✍  सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम।
न्यायालय ने वृद्ध की हत्या करने के मामले में आरोपी 52 वर्षीय जीवणा पारगी पिता कमजी पारगी ग्राम मातर (सरवन)  को भादंवि की धारा 302 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर तीन हजार रुपए का जुर्माना भी किया गया। अभियुक्त जीवणा ने करीब पांच वर्ष पहले लकड़ी से पीटकर अपने पड़ोसी वृद्ध की हत्या कर दी थी। सुनवाई के दौरान अभियुक्त ने तर्क दिया कि मृतक की मृत्यु गिरने या एक्सीडेंट होने से हुई है तथा जिस लकड़ी पर मृतक का खून लगा है, वह सामान्य लकड़ी और जलाने या खाना बनाने के काम आती है। न्यायालय ने उसके तर्क को खारिज करते हुए कहा कि खून लगा लकड़ा (लकड़ी) सामान्यतः वैवाहिक या घरेलू कार्यों में उपयोग नहीं किया जाता। फैसला सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने सुनाया।
     मामला यह है कि 19 व 20 दिसंबर 2020 की दरमियानी रात अभियुक्त जीवणा पारगी के छोटे भाई दिनेश की शादी के लिए हल्दी व संगीत कार्यक्रम चल रहा था। तब किसी बात को लेकर अभियुक्त जीवणा अपनी पत्नी दरियाबाई से विवाद कर रहा था। भाई दिनेश, माता-पिता व अन्य लोगों ने समझाने का प्रयास किया था लेकिन वह नहीं मान रहा था। उसने पत्नी से मारपीट की थी। विवाद के दौरान पड़ोसी 60 वर्षीय जीवला उर्फ जीवा पिता नानिया भी जीवणा को समझाने गए थे तथा उन्होंने अभियुक्त जीवणा पारगी को विवाद नहीं करने की समझाइश दी थी। समझाने के बाद भी नहीं मानने पर भाई दिनेश व माता-पिता उसकी पत्नी को लेकर दूसरे मकान पर चले गए थे। कुछ देर बाद आरोपी जीवणा परागी ने अपने घर के सामने जीवला उर्फ जीवा से झूमाझटकी कर उनके साथ लकड़ी से मारपीट कर जीवा की हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद उसने शव अपने घर के आंगन में ले जाकर डाल दिया था। अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने बताया कि  मृतक के पुत्र फरियादी महिपाल ने सरवन थाने पर 20 दिसंबर 2020 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुबह आठ बजे मेरे परिवार के भीमा निनामा ने फोन करके बताया कि तेरे पिताजी जीवणा के घर के आंगन में पड़े हुए हैं, आकर संभाल। उसके बाद मैं व परिजन ने जीवणा आंगन में जाकर देखा तो वहां पिता जीवला पड़े हुए थे तथा उनके सिर में पीछे की ओर से खून निकल रहा था और पिताजी की मृत्यु हो गई थी। जीवणा के घर के पास में रहने वाले बबला पिता भाणजी ने मुझे बताया जीवणा जब उसके परिजन से विवाद कर रहा था तो तेरे पिता जीवला भी वहां आए थे तथा जीवणा के परिजन के अन्य मकान पर जाने के बाद खाट पर सो गए थे। रात करीब तीन बजे जीवला की आवाज आई थी कि जीवणा मुझे मत मार, मेरे से उठते भी नहीं बन रहा है। पुलिस ने हत्याका प्रकरण दर्ज कर अभियुक्त जीवणा पारगी को गिरफ्तार कर लिया था और उसकी निशानदेही पर खून से सनी लकडी (खाखरे का लकड़ा) बरामद की गई थी। प्रकरण में शासन की तरफ से पैरवी अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने की।
          न्यायालय ने अभियुक्त के तर्कों को किया खारिज
   अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने बताया कि पुलिस ने अभियुक्त जीवणा पारगी के निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त लकड़ा जांच के लिए भेजा था। डीएनए रिपोर्ट में अभियुक्त से जप्त लकड़े पर खून लगा हुआ पाया गया। वैज्ञानिक परीक्षण में उस लकड़े पर मृतक जीवला का डीएनए प्रोफाइल पाया गया, जिससे सिद्ध हुआ कि  उसी लकड़े से हत्या की गई थी। अभियुक्त जीवणा का तर्क था कि वह एक सामान्य लकड़ी है जो खाना बनाने या जलाने के काम आती है। मृतक की मृत्यु अंधेरे में पथरीले रास्ते पर गिरने या दुर्घटना (एक्सीडेंट) से हुई थी। न्यायालय ने अभियुक्त के तर्क खारिज करते हुए कहा कि खून लगा हुआ लकड़ा सामान्यतः वैवाहिक या घरेलू कार्यों में उपयोग नहीं किया जाता। मृतक के पीएम के समय मृतक के सिर, हाथ, कोहनी और पैरों पर गंभीर चोटें होना पाई गई।  न्यायालय ने गुण-दोष के आधार पर अभियुक्त को आजीवन कारावस की सजा सुनाई। वह जमानत पर चल रहा था। फैसला सुनाने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।