साइबर ठगों ने कुवैत से आए मोटर पार्ट्स व्यवसायी से 55 लाख रुपए ठगे, पुलिस व एटीएस अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की गई ठगी
0 सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज भेजकर रुपये ट्रांसफर करने के लिए किया मजबूर 0 रतलाम पुलिस ने कार्रवाई कर 15 लाख रुपए फ्रीज कराए 0 20 लाख की अतिरिक्त ठगी होने से रोका, पुलिस एफआईआर कर आरोपियों की तलाश में जुटी
✍️ सर्च इंडिया न्यूज डॉट कॉम रतलाम।
मध्य प्रदेश के रतलाम शहर के माणकचौक थाना क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति से साइबर ठगों द्वारा करीब 55 लाख रुपए की ठगी करने का मामला सामने आया है। पीडित व्यक्ति कुवैत में रहकर मोटर पार्ट्स का व्यवसायी करते हैं और इन दिन रतलाम अपने घर आए हुए है। उन्हें साइबर ठगों द्वारा फोन कर पुलिस व एटीएस अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट करने की जानकारी देकर डरायागया कि एक अन्य मोबाइल नंबर उनके नाम से जारी हुआ है तथा उस नंबर से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एजेंट से संपर्क किया गया है। आपराधिक प्रकरण में फंसाने का भय दिखाकर वीडियो कॉल एवं फोन के माध्यम से निगरानी में रखते हुए उनसे दो दिन में अलग-अलग बैंक खातों में करीब 55 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए।
पुलिस के अनुसार पीड़ित व्यक्ति कुवैत में रहकर वहां मोटर पार्ट्स का व्यवसाय करते हैं। वे करीब दो माह से रतलाम आए हुए हैं। 15 सितंबर 2026 को वे जब रतलाम में थे तब अज्ञात मोबाइल नंबर से उन्हें फोन कॉल आया, रिसिव करने पर सामने वाले ने स्वयं को महाराष्ट्र के कोलाबा का पुलिस इंस्पेक्टर बताते हुए उनसे उनके मोबाइल नंबर, व्यवसाय एवं भारत में रहने संबंधी जानकारी पूछी। कुछ देर बाद साइबर ठगों ने एक अन्य मोबाइल नंबर के संबंध में पूछताछ करते हुए दावा किया कि जो नबंर बताया जा रहा है वह नंबर उनके नाम पर जारी हुआ है तथा उस नंबर से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एजेंट से संपर्क किया गया है। इस प्रकार उन पर गंभीर आपराधिक मामले में फंसने का भय बनाया गया। इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन एवं व्हाट्सएप वीडियो कॉल कर साइबर ठगों ने स्वयं को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं एटीएस अधिकारी बताते हुए उनसे आधार कार्ड एवं पैन कार्ड सहित अन्य व्यक्तिगत जानकारी भी प्राप्त कर उन्हें बताया कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है। साइबर ठगों ने व्हाट्सएप के माध्यम से पीड़ित व्यक्ति को पुलिस यूनिफॉर्म में दिखाई दे रहे व्यक्तियों के वीडियो कॉल किए तथा स्वयं को एटीएस अधिकारी बताते हुए उन्हें हथियारों से संबंधित फोटो एवं अन्य दस्तावेज भेजकर उनमें दिखाई दे रहे व्यक्तियों की पहचान करने के लिए कहा गया। ठगों ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के लेटरहेड जैसे दिखने वाले फर्जी दस्तावेज भी पीड़ित को भेजे तथा उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज होने की बात कही। इसके बाद कथित रूप से राशि के सत्यापन के नाम पर पीड़ित से बैंक खाते में रुपए ट्रांसफर करने को कहा गया।
दो दिन में 55 लाख रुपए बैंक खातों में कराए ट्रांसफर
ठगों के दबाव एवं भय के चलते पीड़ित व्यक्ति ने पहले 17 सितंबर 2026 को 35 लाख रुपए साइबर ठगों द्वारा बताए बैंक खाते में भेजे। इसके बाद 18 सितंबर 2026 को 20 लाख रुपए साइबर ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में RTGS के माध्यम से ट्रांसफर किए। उन्हें विश्वास दिलाया गया कि जांच कर मामले का सत्यापन कर राशि वापस कर दी जाएगी।
परिजनों की सतर्कता व पुलिस कार्रवाई
से 20 लाख की अतिरिक्त ठगी रुकी
पीड़ित व्यक्ति शनिवार को अपने घर पर अकेले थे। उनके परिजन से फोन कॉल कर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसिव नहीं किए। उनकी पत्नी ने रतलाम में मौजूद रिश्तेदारों से संपर्क किया। बाद में संपर्क होने पर परिजनों को पता चला कि पीड़ित हड़बड़ी में लग रहे है और बड़ी राशि (20 लाख रुपए) किसी को भेजने के संबंध में बात कर रहे है। परिजनों ने तत्काल रतलाम साइबर सेल से संपर्क किया। साइबर सेल के प्रधान आरक्षक लक्ष्मीनारायण सूर्यवंशी एवं परिजनों द्वारा पीड़ित को समझाइश देकर अतिरिक्त 20 लाख रुपए की राशि ट्रांसफर करने से रोका गया। इसके बाद साइबर सेल एवं माणकचौक पुलिस द्वारा पीड़ित की काउंसलिंग कर उन्हें समझाया गया कि वे साइबर ठगों के डिजिटल अरेस्ट के झांसे में आ गए हैं।
NCRP पोर्टल से 15 लाख रुपए किए गए फ्रीज
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी अमित कुमार ने एएसपी विवेक कुमार एवं राकेश पंद्रो के मार्गदर्शन में साइबर सेल एवं माणकचौक थाना पुलिस को तत्काल मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए गए। माणकचौक थाना प्रभारी विक्रम सिंह चौहान, साइबर सेल प्रभारी (एसआई) जीवन बारिया एवं साइबर सेल की टीम ने तत्काल तकनीकी कार्रवाई शुरू की। टीम द्वारा NCRP पोर्टल के माध्यम से संबंधित बैंकिंग चैनल में त्वरित कार्रवाई करते हुए 15 लाख रुपए की राशि फ्रीज करवाने में सफलता प्राप्त की गई। पुलिस के अनुसार मामले में E-FIR दर्ज कर ली गई है तथा ठगी में शामिल आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी एवं शेष राशि की रिकवरी के लिए पुलिस टीम गठित कर आगे की विवेचना एवं तकनीकी जांच की जा रही है।
पुलिस ने की नागरिकों से अपील
0 कोई भी पुलिस अधिकारी, CBI, ED, NCB, TRAI, ATS अथवा सुप्रीम कोर्ट के नाम पर फोन या वीडियो कॉल कर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं कर सकता।
0 कोई व्यक्ति फोन/वीडियो कॉल पर स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर गिरफ्तारी, एफआईआर, मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स, सिम कार्ड अथवा किसी अन्य आपराधिक मामले का भय दिखाकर रुपए ट्रांसफर करने को कहता है, तो यह साइबर ठगी का संकेत है।
0 किसी के डराने पर घबराएं नहीं, किसी भी बैंक खाते में राशि ट्रांसफर न करें और तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें अथवा नजदीकी पुलिस/साइबर हेल्प डेस्क से संपर्क करें।
0 साइबर अपराध के खिलाफ त्वरित कार्रवाई, नागरिकों की सुरक्षा रतलाम पुलिस की प्राथमिकता है।