जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल, जटिल ऑपरेशन के बाद अब चलने-फिरने लगा युवक
0 सड़क दुर्घटना में टूट गई थी पैर की हड्डी 0 आठ माह से पैरो पर चल नहीं पा रहा था 0 जटिल ऑपरेशन के बाद अपने पैरों पर हुआ खड़ा
✍ आरिफ कुरैशी/सर्च इंडिया न्यूज डॉट कॉम, रतलाम।
आमतौर पर सरकारी अस्पतालों के बारे में कई लोगों की सोच होती है कि वहां अच्छा इलाज नहीं होता, लेकिन ऐसा नहीं है। हमारा मानना है कि सरकारी अस्पतालों में भी बेहतर इलाज होता है। हर दिन देश में लाखों लोग सरकारी अस्पतालों में ही इलाज कराते हैं और स्वस्थ भी होते हैं। हां यहा सही है कि सरकारी अस्पतालों में प्रायवेट अस्पतालों जैसी कुछ सुविधाएं नहीं मिलती। इसका कारण यह है कि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में या नाम मात्र के शुल्क पर इलाज की सुविधा मिलती है, जबकि प्रायवेट अस्पताल में बहुत ज्यादा रूपया खर्च करना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ होती है, जबकि प्रायवेट अस्पतालों में सरकारी अस्पतालों के मुकाबले कम भीड़ होती है। केवल सोच बदलने की जरूरत है कि सरकारी अस्पतालों में भी बेहतर इलाज होता है। रतलाम के सरकारी जिला अस्पताल (सिविल हॉस्पिटल) के डॉक्टर बेहतर इलाज करते आए हैं और एक बार फिर उन्होंने सड़क हादसे में पैर की हड्डी टूटने से चलने-फिरने में लाचार हुए एक युवक का जटिल ऑपरेशन कर उसे चलने-फिरने लायक कर एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी बेहतर इलाज होता है।
हाल ही में जिला चिकित्सालय रतलाम के चिकित्सकों ने चलने-फिरने में असमर्थ एक युवक के पैर की जटिल अस्थि शल्य चिकित्सा कर उसे नया जीवन दिया है। इस बारे में जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ. एपी सिंह ने बताया कि राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के ग्राम छायन बड़ी निवासी 24 वर्षीय गोरधन पिता नानजी का पिछले वर्ष अक्टूबर में सड़क दुर्घटना में पैर गंभीर रूप से घायल हो गया था। प्राथमिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय बांसवाड़ा एवं एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराया गया, लेकिन पैर सही नहीं जुड़ पाया। लगातार तीन माह उपचार के बाद भी स्थिति बिगड़ती गई, पैर टेढ़ा हो गया और उसे चलने-फिरने में गंभीर परेशानी होने लगी। बाद में उन्हें उदयपुर या जयपुर रेफर कर दिया गया। छह से सात माह तक परेशानी झेलने के बाद गोरधन को जिला चिकित्सालय रतलाम में पदस्थ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत निनामा के बारे में जानकारी मिली कि वे उसका पैर ठीक कर सकते हैं। इसके बाद वह उपचार के लिए रतलाम जिला अस्पताल पहुंचा, जहां अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत निनामा एवं डॉ. अभिनव जैन की टीम ने उसके पैर की बारिकी से जांच की और जांच के दौरान पाया कि उसका पैर गलत तरीके से जुड़ गया है, जिसे दोबारा जटिल ऑपरेशन कर सही करना आवश्यक है। डॉक्टरों ने उसके परिजनों को ऑपरेशन की प्रक्रिया एवं संभावित जोखिमों की जानकारी दी और उसके बाद मई माह में उनकी सहमति से शल्य चिकित्सा की गई।
युवक व परिजन ने आभार माना
डॉ. भरत निनामा एवं डॉ. अभिनव जैन की टीम ने सफलतापूर्वक जटिल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद गोरधन को कई दिन तक जिला अस्पताल में भर्ती रखकर उसकी देख-रेख की गई। सफल ऑपरेशन के बाद अब वह न केवल अपने पैरों पर खड़ा होने लगा है, बल्कि चलने भी लगा है। ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी डॉ. महेश मौर्य ने निभाई। लगभग एक माह के उपचार एवं पुनर्वास के बाद गोरधन का पैर पूरी तरह ठीक हो गया। गोरधन और उनके परिजनों ने सफल उपचार के लिए चिकित्सकों एवं जिला चिकित्सालय की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनकी प्रशंसा की।
दो घंटे चला ऑपरेशन
अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत निनामा ने बताया कि एक सड़क हादसे में गोरधन के सीधे पैर के घुटने के नीचे की हडड् टूट गई थी। इसके कारण वह चल-फिर नहीं पा रहा था। उसने कहीं एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराया था लेकिन वहां ऑपरेशन के बाद भी उसके पैर की हड्डी ठीक से नहीं जुड़ पाई थी और उसका पैर टेड़ हो गया था। वह न तो चल पा रहा और न ठीक से खड़ा हो पा रहा था। हमारे पास वह इलाज के लिए आया तो हमने उसके पैर की जांच कर फिर से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। करीब दो घंटे तक ऑपरेशन चला और उसकी हड्डी फिर से जोड़ी गई। उसका ऑपरेशन सफल रहा और अब वह न केवल ठीक से खड़ा हो पा रहा है, बल्कि चलने-फिरने भी लगा है।