सियासत में अनोखी मिसाल : सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार करेंगे एलएमएल की पढ़ाई, छोडेंगे वेतन-भत्ता

- वेतन-भत्ते छोड़ने के लिए विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष के अलावा वित्त मंत्री, प्रमुख सचिव आदि को लिखा पत्र

सियासत में अनोखी मिसाल : सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार करेंगे एलएमएल की पढ़ाई, छोडेंगे वेतन-भत्ता
-----------------------------------------

✍  सर्च इंडिया न्यूज, सैलाना/रतलाम।
मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं में रहने वाले रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा सीट से भारत आदिवासी पार्टी (BAP)  के विधायक कमलेश्वर डोडियार एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार वे पढ़ाई के प्रति अपने वेतन-भत्तों का समर्पण करने के फैसले को लेकर चर्चा में है। उन्होंने अब एक ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है, जिसने सबको चौंका दिया है। विधायक डोडियार ने  एलएलएम पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स की अपनी पढ़ाई के दौरान आगामी करीब 10 महीने तक अपना वेतन और भत्ता न लेने का फैसला किया है।
   अपने फैसले के संबंध में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को एक आधिकारिक पत्र भी लिखा है। पत्र की प्रति विधानसभा अध्यक्ष सहित संसदीय कार्य मंत्री, वित्त मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, जनजातीय कार्य मंत्री सहित मुख्य सचिव मप्र. शासन, विधानसभा प्रमुख सचिव को भेजी गई है। विधानसभा अध्यक्ष व अन्य को भेजे गए पत्र में विधायक कमलेश्वर डोडियार ने उल्लेख किया कि वे विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 221-सैलाना से निर्वाचित विधानसभा सदस्य हैं और नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल में एक वर्षीय एलएलएम पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स में अध्ययन एवं शैक्षणिक कार्यों में 20 जुलाई 2026 से संलग्न रहेगे।  इस कारण वे अपनी स्वेच्छा से विधायक के रूप में देय वेतन एवं भत्ते ग्रहण नहीं करना चाहते हैं। अनुरोध है कि उनके इस स्वैच्छिक निर्णय को स्वीकार करते हुए 20 जुलाई 2026 से 15 मई 2027 तक नियमित कक्षाओं और परीक्षाओं के चलते उन्हें देय विधायक वेतन एवं भत्तों का भुगतान स्थगित करने का कष्ट करें। यह निर्णय मैंने बिना किसी दबाव के अपनी स्वेच्छा से लिया है। भविष्य में यदि वेतन एवं भत्ते पुनः प्राप्त करने की आवश्यकता होगी, तो इस संबंध में पृथक आवेदन प्रस्तुत करेंगे।
        समय-समय पर करेंगे जनसुनवाई व दौरा
     विधायक डोडियार ने बताया कि अकादमिक सत्र 2026-27 के करीब 10 महीने के दौरान बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया और नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल के उपस्थिति और अध्ययन संबंधी नियमों/शर्तों का पालन करते हुए पढ़ाई और संवैधानिक कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाते हुए प्राथमिकता से विधानसभा सत्र में उपस्थित होकर जनता के हितों के लिए विधायक के रूप में कर्तव्यों के निर्वहन और विधानसभा क्षेत्र में शासकीय कार्यक्रमों और गतिविधियों में भी भागीदारी सुनिश्चित करते हुए समय-समय में जन समस्याओं पर सुनवाई शासन-प्रशासन से जन हितों के नियमित संपर्क भी बनाए रखने का प्रयास करेंगे। उन्होंने बताया कि करीब 10 महीने का वेतन भत्ता छोड़ने के बाद जरूरी समय पर वे स्वयं के खर्चे से विधानसभा क्षेत्र में दौरे कार्यक्रम और जन सुनवाई जैसे कार्यक्रमों में उपस्थिति आदि सुनिश्चित करेंगे। अध्ययन के दौरान विधानसभा सदस्य के रूप कर्तव्यों का निर्वहन प्राथमिकता से करेंगे।  
                   दौरे का खर्च खुद उठाएंगे
                 चर्चा का विषय बना फैसला
    उनके इस फैसले की सबसे खास बात यह है कि डोडियार ने इस अवधि के दौरान विधानसभा क्षेत्र के दौरों और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों का पूरा खर्च स्वयं उठाने की घोषणा की है। उनका कहना है कि वे शिक्षा और जनसेवा के बीच एक आदर्श संतुलन बनाना चाहते हैं, ताकि जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारियों में कोई कमी न आए। विधायक कमलेश्वर डोडियार का यह कदम सामने आते ही मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। लोग उनके फैसले को जनप्रतिनिधियों के लिए एक सकारात्मक,  नैतिक और बेहद प्रेरणादायक पहल के रूप में देख रहे हैं। आदिवासी क्षेत्र से निकल कर निकलकर विधानसभा पहुंचने वाले युवा विधायक कमलेश्वर डोडियार का शिक्षा के प्रति यह झुकाव युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।