बैंक में 44 लाख से ज्यादा के गबन मामले में सेंट्रल बैंक के पूर्व मैनेजर को चार वर्ष की सजा, जेल भेजा
- दो आरोपियों की हो चुकी है मौत, छह आरोही दोषमुक्त
✍ सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम ।
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के बड़ावदा नगर में स्थित संट्रेल बैक ऑफ इंडिया की बड़ावदा शाखा में करीब 12 वर्ष पहले हुए 44 लाख रुपए से ज्यादा के गबन मामले में न्यायालय ने मुख्य आरोपी पूर्व बैंक मैनेजर (शाखा प्रबंधक) नेविल कावराना निवासी मुंबई को चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। फैसला मंगलवाल को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश संजीव कटारे ने दिया।
अभियोजन विभाग की प्रभारी उपनिदेशन व सहायक निदेशक आशा शाक्यवार ने बताया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बड़ावदा (जावरा) शाखा में वर्ष 2012 से 2014 के बीच 44 लाख 46 हजार 717 हजार रुपए का गबन हुआ था। उक्त गबन का खुलासा प्रकरण के मुख्य आरोपी नेविल कावराना के अन्य स्थान पर स्थानांतरण होने के बाद बडावदा शाखा में पदस्थ हुए नए शाखा प्रबंधक सुमित जैन द्वारा विस्तृत जांच रिपोर्ट व शिकायत बैंक के वरिष्ठ कार्यालय व ईओडब्ल्यू. उज्जैन को भेजने पर हुआ था। उन्होंने मामले में वर्ष 2014 में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई उज्जैन को शिकायत की थी कि पूर्व प्रबंधक मुख्य आरोपी नेविल कावराना ने बड़ावदा शाखा में पदस्थ रहते हुए छल-पूर्वक अपने पद का दूरूपयोग करते हुए, गबन कर स्वयं के खातें, परिजनों के खातों एवं बिजनेस फैसिलेटर देवेंद्र कुमार सांड तथा उसके परिजनों के खातों में राशि पहुंचाकर अवैध लाभ प्राप्त किया है। जांच में पाया गया कि यह कृत्य में पूर्व बैंक मैनेजर नेविल कावराना व बैंक के बिजनेस फेसिलीटेटर आरोपी देवेन्द्र सांड सहित कुल नौ सह-आरोपियों ने मिलीभगत कर बैंक के वित्तीय सॉफ्टवेयर और दस्तावेजों में हेरफेर किया गया था। बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुमि जैन ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उज्जैन को विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपकर आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया था।
सिस्टम में किए जाते थे प्रकरण निरस्त
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उज्जैन द्वारा विस्तृत विवेचना करने पर पाया था कि आरोपी शाखा प्रबंधक नेविल कावराना ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बिजनेस फेसिलीटेटर आरोपी देवेन्द्र सांड एवं अन्य लोगों व परिजनों के साथ मिलकर एक सुनियोजित वित्तीय घोटाले को अंजाम दिया था। प्रकरण के मुख्य आरोपी नेविल कावराना द्वारा क्षेत्र के भोले-भाले किसानों की सहमति और जानकारी के बिना उनके किसान क्रेडिट कार्ड व अन्य खातों से अवैध रूप से राशियां डेबिट (काट) ली जाती थीं। जिसे अपने स्वयं के एवं अन्य सहआरोपीगणों के बैंक खातों में जमा कर दी जाती थी। कृषकों एवं खाताधारकों के खातो से काटी गई राशियों से फसल बीमा कंपनियों (जैसे चोलामंडलम एम.एस. इंश्योरेंस, एल.आई.सी. ऑफ इंडिया) तथा शासकीय राजस्व मद (वसूली हेतु तहसीलदार) के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट तैयार किए जाते थे। उक्त डिमांड ड्राफ्ट्स को संबंधित बीमा कंपनियों या विभागों को न भेजते हुए, मुख्य आरोपी नेविल कावराना द्वारा स्वयं ही उन्हें सिस्टम में निरस्त कर दिया जाता था। निरस्त की गई राशि को वह अन्य सहआरोपीगण अपनी पत्नी खुर्शीद खोखरी कावराना, अन्य रिश्तेदारों जिजी कावराना, जिमी खोखरी, गुलनाज कावराना मेहता, शहजाद मेहता, यास्मीन कावराना तथा बिजनेस फेसिलीटेटर देवेन्द्र सांड व उसकी पत्नी प्रीति सांड के संयुक्त एवं निजी खातों में ट्रांसफर कर अवैध रूप से आहरित कर लेता था। मुख्य आरोपी नेविल कावराना द्वारा न केवल खाताधारकों, बल्कि बैंक के सेंड्री क्रेडिटर खातों तथा लाभ-हानि मद से भी अवैध रूप से राशियां को निकालकर कर स्वयं के एवं अन्य सहआरोपीगणों के खातों में जमा कराई गईं थी।
दो आरोपियों की हो चुकी है मौत, छह दोषमुक्त
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उज्जैन ने विवेचना के बाद मुख्य आरोपी पूर्व बैक प्रबंधक नेविल कावराना, इसकी पत्नी खुर्शीद कावराना निवासी मुंबई (महाराष्ट्र), रिश्तेदार यास्मीन कावराना निवासी मुंबई, गुलनार कावराना व शहजाद मेहता दोनों निवासी सुथान फलिया जिला सूरत (गुजरात), जीमी खोखरी निवासी नवसारी सूरत (गुजरात), बैंक के सर्विस प्रोपाइड देवेंद्र सांड, कांता सांड व प्रीति सुधा सांड तीनों निवासी बड़ावदा के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया था। न्यायालय ने मुख्य आरोपी नेविल कारवाना को दोषी पाकर सजा सुनाई। आरोपी देवेंद्र कुमार सांड व कांता सांड की मृत्यु हो चुकी है। शेष छह आरोपियों खुर्शीद खोखरी कावराना, जिमी कावराना, यास्मीन कारवाना, जिजी कावराना, गुलनाज कावराना मेहता, शहजाद मेहता तथा प्रीति सांड को आरोप प्रमाणित नहीं होने पर दोषमुक्त किया गया।
इन धाराओं में किया गया दंडित
सुनवाई के बाद दोषी पाए जाने पर मंगलवार को न्यायालय ने मुख्य आरोपी नेविल कावराना को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 एवं 13(1) (क) (ख) और भादंवि की धारा 120 बी व 409 में क्रमश: चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथी ही भादंवि की धारा 420 में तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भी सुनाई। सभी सजा साथ चलेगी। प्रकरण में शासन की तरफ से पैरवी विशेष लोक अभियोजक कृष्णकांत चैहान ने की।