अनेक जिलों में अति व भारी बारिश की चेतावनी, रतलाम जिले में रिमझिम बारिश का दौर जारी
- 24 घंटे में सबसे ज्यादा तीन-तीन इंच बारिश जावरा व पिपलौदा में, ताल में करीब डेढ़ इंच और सैलाना तहसील में करीब एक इंच बारिश हुई
✍ सर्च इंडिया न्यूज डॉट कॉम, रतलाम।
लंबे ब्रेक के बाद मध्य प्रदेश के अन्य जिलों के साथ ही रतलाम जिले में पिछले तीन दिन से बारिश रुक-रुक कर बारिश हो रही है। इससे जहां तापमान में गिरावट आने से मौसम ठंडा हो गया हैं, वहीं सूखने की कगार पर पहुंची फसलों को राहत मिली है। मौसम विभाग भोपाल ने अगले पांच दिन प्रदेश के अनेक जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान सीहोर, रायसेन व सिवनी जिले में कहीं-कहीं अति बारिश और मंदसौर, विदिशा, रतलाम व कटनी जिले में भारी बारिश हो सकती है।
मौसम विशेशज्ञों के अनुसार ऊपरी वायु मंडलीय चक्रवातीय परिसंचरण दक्षिण-पूर्वी राजस्थान तथा उससे लगे उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर औसत समुंद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अनेक जिलों में अगले पांच दिनों तक बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग दवारा जारी प्रेस रीलिज के अनुसार 24 जुलाई की सुबह 8.30 बजे तक बड़वानी व धार जिले में अति भारी बारिश, सीहोर, उज्जैन, शाजापुर, सतना व कटनी में भारी बारिश का अनुमान है। वहीं भोपाल विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतुल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, आलीराजपुर,, झाबुआ, इंदौर, रतलाम, देवास, आगर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोक नगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, सिंगरौली, सीधी, रीवा सहित अन्य जिलों में कहीं-कहीं झंझावत, और वज्रपात की स्थिति बन सकती है तथा तथा 30 से 40 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चलेगी।
24 जुलाई को इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार 24 जुलाई सुबह साढ़े आठ बजे से 25 जुलाई साढ़े सुबह आठ बजे तक आलीराजपुर, रतलाम, मंदसौर, श्योपुरकलां व पन्ना जिले में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है और आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है। वहीं भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, बैतुल, नर्मदापुरम, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, झाबुआ, धार, इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर, नीमच, गुना, अशोक नगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर व पांढुर्ना जिले में कहीं-कहीं बारिश, झंझावत, व वज्रपात की स्थिति बन सकती है। वहीं 24 जुलाई को रतलाम व धार जिले में भारी बारिश होने की संभावना है।
किसानों के लिए सलाह
किसानों को सलाह दी गई है कि बारिश के दौरान सिंचाई, उर्वरक प्रयोग तथा पौध संरक्षण रसायनों के छिड़काव से बचे, खेतों में उचित जल निकासी की व्यवस्था करें, ताकि जलभराव एवं जड़ों को होने वाली क्षति से बचाव हो सके। तेज हवाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सब्जी फसलोँ, बेलदार पौधों तथा युवा फलदार पौधों का सहारा (स्टेकिंग) प्रदान करें। पॉलीहाउस, नेट हाउस, शेड नेट तथा अन्य संरक्षित खेती की संरचनाओं को तेज हवाओं से सुरक्षित रखें। पशुओं को हवादार व सुरक्षित आश्रयों में रखे तथा आंधी-तूफान एवं बिजली गिरने के दौरान चराई से बचे।
आम लोगों को सलाह
आम लोगों को सलाह दी गई है कि अति बारिश होने की स्थिति में निचले व बाढ़ग्रस्त इलाकों से दूर रहें, खतरे के निशान के आसपास बह रही नदियों के मैदानों से दूर रहे। नालों व मौसमी जलधाराओं से दूर रहें। फिसलन भरी सड़कों एवं खराब दृश्यता की स्थिति में वाहन चलाते समय सावधानी बरतें। भारी बारिश होने पर अचानक आने वाली बाढ़ की संभावना वाले क्षेत्रों से दूर रहें। पक्के तथा सुरक्षित मकानों में रहे। मौसमी नदी-नालों से दूर रहे। गड्डो, पोखरों व तालाबों में जहां बाहर से पानी आता है, वहां नहाने से बचे। खतरे के निशान के आसपास बह रही नदियों से दूर रहें। आंधी-तूफान की स्थिति बनने पर घरों के अंदर रहे, खिड़कियों व दरवाजों को बंद रखे। संभव हो तो यात्रा से बचे, वाहन चलाते समय सावधानी रखें, बिजली व इलेक्ट्रानिक उपकरणों को अनप्लग करें।
रतलाम जिले में तीन दिन से रिमझिम बारिश
रतलाम जिले में मानसून के वापस लौटने से तीन दिन से रूक-रूक कर रिमझमि व कहीं-कहीं तेज बारिश हो रही है। रतलाम मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार सुबह साढ़े आठ बजे तक जिले में पिछले 24 घंटों के भीतर 1.20 इंच बारिश दर्ज की गई। इस दौरान करीब जावरा व पिपलौदा तहसील में करीब तीन-तीन इंच, ताल में करीब डेढ़ इंच और सैलाना तहसील में करीब एक इंच बारिश हुई। वहीं आलोट तहसील में 14 मिलीमीटर, बाजना, रावटी व रतलाम तहसील में पांच-पांच मिलीमीटर बारिश हुई। करीब 12 दिन के ब्रेक के बाद सूखने की कगार पर पहुंची फसलों को बारिश होने से राहत मिली है। किसानों का कहना है कि बारिश नहीं होने से खेतों में नमी कम हो रही थी और सूखे की स्थिति बन रही थी लेकिन 20 जुलाई से पुन: प्रारंभ हुई बारिश से फसलें सूखने से बच गई।