सनसनीखेज ट्रिपल मर्डर के तीन आरोपियों को तिहरा आजीवन कारावास, मुख्य आरोपी दिलीप देवल पहले ही मारा जा चुका है पुलिस मुठभेड़ में
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✍ सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम।
न्यायालय ने करीब साढ़े पांच वर्ष पहले घर में घुसकर एक व्यक्ति, उसकी पत्नी व पुत्री की गोली मारकर हत्या करने व रुपए और जेवर लूटने के बहुचर्चिच मामले में अभियुक्त 33 वर्षीय अनुराग उर्फ बॉबी पिता प्रवीण सिंह परमार निवासी विनोबा नगर रतलाम, 27 वर्षीय 29 वर्षीय गोलू उर्फ गौरव पिता राजेश बिलवाल निवासी रेल्वे कॉलोनी रतलाम और लाला पिता मनु उर्फ भरत उर्फ भारता भाभोर निवासी ग्राम अभलोड लिम्बू फल्या, थाना-जेसावाड़ा, जिला-दाहोद (गुजरात) को तिहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अभियुक्तों पर अलग-अलग धाराओं में कुल पचास-पचास हजार रुपए का जुर्माना भी किया गया। इस ट्रिपल मर्डर कांड का मुख्य आरोपी दिलीप दिवेल निवासी ग्राम खरेडी डूंगरी जिला दाहोद (गुजरात) पहले ही पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है।
अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने बताया कि 25 नवंबर 2020 को छोटी दीपावली की रात घर में घुसकर अज्ञात बदमाशों ने जवाहर नगर मुक्तिधाम के पास स्थित राजीव नगर में 50 वर्षीय गोविंद सोलंकी, उनकी पत्नी 45 वर्षीय शारदा एवं पुत्री 21 वर्षीय दिव्या की गोली मारकर निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी। घटना का खुलासा तब हुआ जब दूसरे दिन 26 नवंबर को सुबह 08 बजे मकान में नीचे किराए से रहने वाली किरायेदार नर्स ज्वेलिका को घर के सामने खड़ी कई गई अपनी एक्टीवा स्कूटी दिखाई नहीं दी थी। नर्स ज्वेलिका स्कूटी के बारे में पूछने के लिए जब घर के ऊपर मकान मालिक के कमरे में गई तो वहां का नजारा देख कर वह घबरा गई थी। उससे तत्काल आसपास के लोगों को सूचना दी थी। इससे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। सूचना मिलने पर थाना औद्योगिक क्षेत्र की पुलिस टीम वहां पहुंची थी और घटना की जांच शुरू की थी। कुछ देर बाद तत्कालीन एसपी गौरव तिवारी, एफएसएल अधिकारी डॉ. अतुल मित्तल भी वहां पहुंचे थे पाया था कि घर अंदर गोविंद सोलंकी, उनकी पत्नी शारदा सोलंकी व पुत्री दिव्या सोलंकी जमीन पर पड़े हुए थे। तीनों के सिर में गोली लगी थी और खून निकला हुआ था। पुलिस अधिकारियों व एफएसआल टीम ने बारिकी से जांच की थी। पुलिस ने प्रकरण दर्ज जांच शुरू की थी। तत्कालीन एसपी गौरव तिवारी के निर्देशन व थाना प्रभारी रेवल सिंह बरडे के नेतृत्व में जांच करने वाली पुलिस टीम को पता चला था कि हत्या करने के बाद आरोपी रुपए व जेवर भी लूट कर ले गए है।
स्कूटी ले जाते कैद हुए थे कैमरे में
आरोपियों का पता लगाने के लिए पुलिस ने कई घटना स्थल के आसपास व अन्य क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरे चेक किए थे। कैमरों के फुटेज में आरोपी नर्स की स्कूटी पर जाते दिखाई दिए थे, जिनकी पहचान आरोपी दिलीप देवल व अनुराग उर्फ बॉबी के रूप में हुई थी। इसके बाद पुलिस ने अनुराग को गिरफ्तार कर पूछताछ की थी तो उसने साथी दिलीप देवल, लाला भाभोर व गोलू उर्फ गौरव बिलवाल के साथ मिलकर हत्या करना बताया था। इसके बाद गोलू व लाला को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
मुठभेड़ के दौरान मारा गया था दिलीप देवल
दिलीप देवल की तलाश में पुलिस ने दाहोद, इंदौर सहित अन्य स्थानों पर भी दबिशें दी थी लेकिन वह नहीं मिला था। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी, इसी बीच 3 दिसंबर 2020 की रात पुलिस को सूचना मिली थी कि दिलीप देवल खाचरौद रोड से मिटटाउन कॉलोनी स्थित अपने किराए के मकान पर जा रहा है। सूचना पर पुलिस ने उसकी घेराबंदी कर उसे पकड़ने का प्रयास किया था तो वह भागने लगा था तथा पुलिस टीम पर फायरिंग करने लगा था। जवाब में पुलिस ने भी उस पर फायर किए थे तो गोली लगने से वह घायल होकर नीचे गिर गया था तथा उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं मुठभेड़ में तत्कालीन माणकचौक थाना प्रभारी अय्यूब खान, एसआई अनुराग यादव, सायबर सेल के आरक्षक हिम्मतसिंह, विपुल भावसार व बलराम पाटीदार घायल हुए थे। पुलिस ने दिलीप देवल के मिटटाउन स्थित किराए के घर की तलासी लेने पर एक देशी पिस्टल, जिन्दा राउंड, लूटे गए जेवर व अन्य सामग्री पाई गई थी।
फटाकों की गूंज में नहीं सुनाई दी थी गोलियों की आवाज
आरोपी दिलीप देवल दाहोद में हत्या के एक अन्य मामले में में जेल में बंद था। जमानत पर छूटने के बाद रतलाम में फरारी काट रहा था। वह फर्जी दस्तावेज तैयार कर रतलाम में रह रहा था। दिलीप देवल रुपए व सोने चांदी के जेवर लूटने के लिए हत्याएं करता था। जांच में यह भी सामने आया कि छोटी दीपावली होने से फ़टाको की आवाज में गोलियों की आवाज सुनाई नहीं दे, इस कारण दिलीप देवल ने छोटी दीपावली का दिन हत्या करने के लिए चुना था। रात में जब हत्याएं की गई तो पटाखों की आवाजों की गूंज के चलते आसपास के लोगों को गोलियां चलने की आवाजें नहीं आई थी। पुलिस द्वारा इस मामले को जघन्य एवं सनसनीखेज अपराध के रूप चिन्हित किया था।
इन धाराओं में दी गई सजा
पुलिस ने विवेचना के बाद अभियुक्त अनुराग उर्फ बाबू, गोलू उर्फ गौरव व लाला के खिलाफ न्यायालय में अभियोग-पत्र पेश किया था। सुनवाई के बाद न्यायालय (सप्ताम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव) ने तीन अभियुक्तों को भादंवि की धारा 302 (तीन काउंट) में आजीवन कारावास व धारा 397 में भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दोनों धाराओं में क्रमश: दस-दस हजार रुपए (कुल चालीस-चालीस हजार रुपए) का जुर्माना किया गया। साथ ही धारा 450 व 120 बी में दस-दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा व पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना से भी दंडित किया गया। सभी सजा साथ चलेगी। प्रकरण में शासन की तरफ से पैरवी अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने की।
साक्ष्य रहे सजा के महत्वपूर्ण आधार
अपर अभियोजक समरथ पाटीदार ने बताया कि सजा के महत्वपूर्ण आधार में परिस्थितिजन्य साक्ष्य, डीएनए रिपोर्ट, बैलेस्टिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज व आरोपियों की निशानदेही पर बरामद हथियार, खून लगे कपड़े, मृतकों के लूटे गए आभूषण तथा अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य शामिल रहे।
0 डीएनए जांच में आरोपियों से जप्त लोवर, पेंट, चप्पलों, रुमाल पर मृतक गोविन्द, शारदा व दिव्या का डीएनए पाया गया।
02 फरियादी ज्वेलिका की स्कूटी जिसका घटना में उपयोग किया उसके हैंडल पर अभियुक्त लाला का डीएनए पाया गया।
03 बैलेस्टिक जांच रिपोर्ट से यह प्रमाणिक हुआ कि दिलीप देवल के घर से बरामद देशी पिस्टल से ही मृतकों के पास से मिले कारतूस के तीन खाली खोखे व मृतको के शरीर से निकली गोलियां चलाई गई थी। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष 111 भौतिक वस्तुएं व 210 दस्तावेज प्रस्तुत किए तथा 33 गवाहों के बयान न्यायालय में कराए। वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की सुदृढ़ श्रृंखला के आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तिहरा आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
तत्कालीन मुख्यमंत्री ने की थी पुलिस टीम की प्रशंसा
आरोपी दिलीप देवल के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने टिवटर पर ट्वीट कर पुलिस टीम को धन्यवाद देते पुलिस का हौसला बढ़ाया था। उन्होंने ने ट्वीट किया था कि रतलाम ट्रपिल मर्डर केस का मुख्य आरोपी दिलीप देवल पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। उन्होंने पुलिस को सख्त निर्देश दिए थे कि ऐसे नरपिशाच को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उसे जल्द पकड़ा जाए। उन्होंन यह भी कहा था कि जब पुलिस टीम उसे पकड़ने गई तो उसने टीम पर गोलियां चलाई। बहादुर जवानों ने मुंह तोड़ जवाब दिया। मुठभेड़ में कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, उनके स्वास्थ्य की कामना करता हूं।