गांव की बेटी रुचिका भट्ट ने पूरा किया, दादाजी का सपना, अब बनेंगी डॉक्टर
0 चुनौतियों के बावजूद नहीं मानी हार 0 अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के मार्गदर्शन में हासिल की सफलता 0 RKDF मेडिकल कॉलेज भोपाल में मिला MBBS में प्रवेश
✍️ सर्च इंडिया न्यूज डॉट कॉम, रतलाम।
सपने बड़े शहरों में ही नहीं, छोटे-छोटे गांवों में भी जन्म लेते हैं। यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण, मेहनत और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो किसी भी सपने को हकीकत में बदला जा सकता है। इसका उदाहरण रतलाम जिले के ग्राम रणायरा की बेटी रुचिका भट्ट ने पेश किया है। रुचिका ने अपने दादाजी मदनलाल भट्ट और पिता दिलीप भट्ट के डॉक्टर बनने के सपने को साकार करते हुए RE-NEET-2026 की काउंसलिंग के पहले राउंड में भोपाल के RKDF मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे गांव में खुशी का माहौल है।
11वीं कक्षा से अभ्यास पर जताया भरोसा
अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डॉयरेक्टर राकेश कुमावत ने बताया कि रुचिका भट्ट ने कक्षा 11वीं से ही मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए रतलाम के अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट को चुना था। उन्होंने संस्थान के शिक्षकों के मार्गदर्शन में नियमित पढ़ाई की और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगातार मेहनत करती रहीं। रुचिका के दादाजी का सपना था कि उनकी पोती डॉक्टर बने। रुचिका ने इस सपने को अपनी जिंदगी का लक्ष्य बनाया और उसे पूरा करने के लिए पूरी लगन से तैयारी की। उनके परिवार ने भी हर परिस्थिति में उनका साथ दिया और उनकी मेहनत पर विश्वास बनाए रखा।
परीक्षा रद्द होने के बाद भी नहीं टूटा हौसला
रुचिका की सफलता का सफर आसान नहीं रहा। NEET-2025 में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने दोबारा मेहनत करने करने का निर्णय लिया और NEET-2026 की तैयारी में जुट गईं। 03 मई को आयोजित NEET-2026 की परीक्षा में रुचिका ने 540 अंक प्राप्त किए थे। हालांकि, पेपर लीक की घटना के कारण परीक्षा रद्द होने से उन्हें एक बार फिर अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। इस परिस्थिति में भी रुचिका ने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई जारी रखी। लगातार मेहनत, धैर्य और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण के साथ उन्होंने आगे की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। आखिरकार, RE-NEET-2026 की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की और काउंसलिंग के पहले राउंड में उन्हें RKDF मेडिकल कॉलेज, भोपाल में MBBS की सीट मिल गई। इस उपलब्धि के साथ उनका डॉक्टर बनने का सपना साकार होने की दिशा में एक बड़ा कदम पूरा हुआ।
पिता ने कहा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश
मिलना गर्व और खुशी का क्षण
रुचिका के पिता दिलीप कुमार भट्ट ने बताया कि रुचिका को बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था। रुचिका के दादा व परिवार का भी सपना था कि वह डॉक्टर बने। परिवार ने रुचिका को डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने रतलाम के अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट पर भरोसा जताया। उन्होंने बताया कि NEET-2025 में मनचाहा परिणाम नहीं मिलने के बावजूद रुचिका ने हिम्मत नहीं हारी। इसके बाद NEET-2026 की परीक्षा रद्द होने से भी उसे निराशा का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी और लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। दिलीप कुमार भट्ट ने कहा कि बेटी को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलना पूरे परिवार के लिए गर्व और खुशी का क्षण है। रुचिका ने अपने दादाजी के सपने को पूरा करने की दिशा में सफलता हासिल कर परिवार का मान बढ़ाया है।
अभ्यास की टीम ने घर पहुंचकर किया सम्मानित
रुचिका भट्ट की उपलब्धि पर अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट की टीम उनके गांव रणायरा स्थित घर पहुंची। टीम ने रुचिका और उनके परिवार से मुलाकात की तथा इस उपलब्धि के लिए रुचिका व उनके परिजन को सम्मानित किया। संस्थान की टीम ने रुचिका को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। रुचिका ने अपनी सफलता का श्रेय अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के मार्गदर्शन, शिक्षकों के सहयोग और अपनी मेहनत को दिया। उनकी सफलता संस्थान के लिए भी गर्व का विषय है।
गांव की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
रुचिका भट्ट अपने परिवार की पहली डॉक्टर बनने जा रही हैं। उनकी सफलता ने रणायरा गांव के लोगों को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि उन विद्यार्थियों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद डॉक्टर बनने का सपना देखती हैं। रुचिका की कहानी यह संदेश देती है कि सफलता के लिए केवल बड़े शहर में रहना जरूरी नहीं है। छोटे गांवों से आने वाले विद्यार्थी भी सही मार्गदर्शन, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। रुचिका भट्ट ने अपने दादाजी के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत से सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है।